चंबा। हिमाचल पथ परिवहन निगम लोगों को बेहतर सुविधा देने के दावे करता है, लेकिन इन दावों की पोल चंबा में कलपुर्जों की कमी ने खोलकर रख दी है।
एक तरफ चंबा शहर में इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है, वहीं कलपुर्जे भी नहीं पहुंच पाए हैं। लिहाजा, मरम्मत के अभाव में एचआरटीसी के चंबा डिपो की बसें जगह-जगह खड़ी हो रही हैं। डिपो में भी कई बसें समय पर मरम्मत न होने के कारण धूल फांक रही हैं।
इतना ही नहीं, कलपुर्जे न होने से समय पर बसों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। इससे लंबे रूटों पर भी देरी से ही बसें भेजी जा रही हैं। बीते दिनों भी लंबे रूट पर बस देरी से ही भेजी गई थीं। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ा। बीते कुछ माह पहले प्रदेश सरकार ने हर डिपो में इलेक्ट्रिक बसें चलाने का एलान किया। सभी जिलों से इसके लिए डिमांड मांगी गई थी। चंबा डिपो से 21 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की डिमांड भेजी गई थी। इसकी एवज में एक अदद बस भी चंबा नहीं पहुंच पाई है।
शहर के तीस किलोमीटर दायरे में इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए भेजा गया परिवहन निगम का प्रस्ताव फाइलों में ही घूम रहा है। निगम ने करीब तीन माह पहले इस बाबत प्रस्ताव भेजा था। इसे अभी तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। एचआरटीसी के चंबा डिपो की लगभग 50 बसें लोकल रूट पर दौड़ रही हैं। 21 इलेक्ट्रिक बसें आने से इन्हें स्थानीय रूटों पर चलाया जाना था। इससे जहां ईंधन की बचत होनी थी, वहीं नई बसें आने से लोगों को राहत भी मिलनी थी। उधर, परिवहन निगम का दावा है कि प्रदेश सरकार को प्रस्ताव तो भेजा गया है, लेकिन इसे अभी तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। साथ ही कलपुर्जों की भी लंबे समय से डिमांड भेजी है। यह अभी तक चंबा नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में सरकारी बसें खटारा बनती जा रही हैं। इस कारण निगम को कई रूट भी बंद करने पड़ रहे हैं।
उधर, एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधन शुगल सिंह ने कहा कि उन्होंने 21 इलेक्ट्रिक बसों की मांग का प्रस्ताव भेजा है। साथ ही कलपुर्जों की भी डिमांड भेजी है।