पांगी (चंबा)। बर्फबारी में डूबे पांगी के मुर्छ और चस्क भटोरी गांवों में लोग रात को दीये जलाकर रहने के लिए मजबूर हैं। भारी बर्फबारी के कारण इन गांवों में 16 अप्रैल को बिजली गुल हो गई थी जो अभी तक बहाल नहीं हो पाई है। बिजली बहाली कब तक होगी इसको लेकर भी ग्रामीणों को कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। जनजातीय क्षेत्र पांगी के सबसे दुर्गम इलाकों में इन गांवों को गिना जाता है। ऐसे में यहां रहने वाले 40 परिवारों को कड़ाके की ठंड में रात को बिना बिजली रहना काफी मुश्किल हो रहा है। पांगी में साल के 12 माह मौसम ठंडा रहता है जबकि इन दिनों मुर्छ और चस्क भटोरी में बर्फ गिरी हुई है। ऐसे में बिना बिजली ग्रामीणों के लिए अपने घरों में रहना मुश्किल हो रहा है। लोगों के मोबाइल फोन भी बिजली न होने के कारण स्विच ऑफ हो चुके हैं। ऐसे में यदि गांव में कोई आपदा होती है तो उसकी सूचना प्रशासन तक पहुंचाना ग्रामीणों के लिए मुश्किल हो सकता है।
ग्रामीणों संतोष, प्रेम, मान सिंह और देवराज ने बताया कि जनजातीय क्षेत्र के लिए सरकार भले ही बेहतर सुविधाएं देने को लेकर बड़े-बड़े दावे करती हो लेकिन धरातल पर इन दावों को कोई सरकार पूरा नहीं करती। यही कारण है कि पांगी घाटी के इन गांवों में रहने वाले लोगों को आदिवासियों की तरह जीवन यापना पड़ रहा है। घरों में बिजली कनेक्शन होने के उपरांत भी रात को रोशनी नहीं हो रही है। बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता संतोष शर्मा ने बताया कि बर्फबारी के कारण खंभे क्षतिग्रस्त हो गए हैं जिनकी मरम्मत करवाई जा रही है। खंभों की मरम्मत होते ही गांवों में बिजली आपूर्ति बहाल करवा दी जाएगी।