चंबा। जिले में मक्की की फसल को बंदरों और जंगली सुअरों से बचाना किसानों के लिए चुनौती बन गया है। खेतों में तैयार हो रही फसल की रखवाली के लिए किसान सुबह होते ही परिवार समेत खेतों का रुख कर रहे हैं।
हालात ऐसे हैं कि फसल बचाने के लिए कई किसानों को रात में भी खेतों में पहरा देना पड़ रहा है। इससे किसानों की नींद तक उड़ गई है। जिले के मैहला, मंगला, सलूणी, तीसा, भलेई, साहो, चुराह सहित अन्य क्षेत्रों में दिन के समय बंदरों के झुंड खेतों में पहुंचकर मक्की की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
वहीं, रात के समय जंगली सुअरों का आतंक रहता है। सुअर खेतों में घुसकर फसल को रौंदने के साथ उसे बर्बाद कर देते हैं। बंदरों और जंगली सुअरों के लगातार बढ़ते आतंक के कारण किसानों को दिन-रात फसल की निगरानी करनी पड़ रही है।
किसान धर्म राम, जोगिंद्र कुमार, किशन कुमार, दलीप सिंह, मेहर चंद और सुनील कुमार आदि ने बताया कि बंदरों और जंगली सुअरों के कारण करीब 30 फीसदी तक मक्की की फसल बर्बाद होने का अनुमान है।
कई खेतों में नुकसान इतना अधिक हो रहा है कि किसानों को पैदावार को लेकर चिंता सताने लगी है। किसान परिवार के सदस्यों की बारी-बारी से ड्यूटी लगाकर खेतों की रखवाली कर रहे हैं।
मक्की की फसल किसानों के लिए आय के साथ पशुओं के चारे का भी प्रमुख साधन है। ऐसे में फसल को नुकसान होने से उन्हें दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से बंदरों और जंगली सुअरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने और फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है।
कांटेदार तारें लगाने को आवेदन करें किसान
किसान खेतों में कांटेदार तारें लगाने के लिए आवेदन करें, ताकि कोई जानवर खेतों तक न पहुंच सके। डॉ. भूपेंद्र सिंह, उपनिदेशक, कृषि विभाग
सलूणी में मक्की की फ़सल बचाने के लिए बंदरो का पहरा देती महिलाएं : जागरूक पाठक