चंबा। जिले के निजी अस्पताल में मरीजों की मेजर सर्जरी अब हिमकेयर के तहत मुफ्त नहीं की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल से इसकी मान्यता छीन ली है।
जिले के मरीजों को इस स्कीम के तहत निजी अस्पताल में विशेषज्ञों से मुफ्त इलाज करवाने की सुविधा मिल रही थी। जब यह स्कीम निजी अस्पताल में शुरू हुई थी तो सदर के विधायक ने स्वयं रिबन काटकर इसका शुभारंभ किया था। उस दौरान विधायक ने इसका श्रेय अपनी सरकार को भी दिया था। उनकी सरकार में ही मेजर सर्जरी को निजी अस्पताल में हिमकेयर के तहत मुफ्त होने से मना कर दिया गया है। अब मरीजों की यह सर्जरी न चंबा मेडिकल कॉलेज में हो रही है और न ही निजी अस्पताल में हिमकेयर के तहत मुफ्त की जा रही है। मरीजों को सर्जरी के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ रही है।
पैसे देने में असमर्थ मरीज टांडा मेडिकल कॉलेज कांगड़ा या आईजीएमसी शिमला में मुफ्त ऑपरेशन के लिए भटक रहे हैं। इन अस्पतालों में भी उन्हें ऑपरेशन के लिए तारीख जल्दी नहीं मिल रही है। किडनी की पत्थरी से लेकर अन्य कई बड़ी सर्जरी निजी अस्पताल में मुफ्त नहीं की जा रही है। पहले इसे यूरोलॉजिस्ट निशुल्क कर रहे थे। आज यह सर्जरी करवाने के लिए मरीजों को हजारों रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
हैरानी इस बात है कि दूरबीन से किडनी की पत्थरी का ऑपरेशन करवाने के लिए चंबा के मरीज टांडा या शिमला में ठोकरें खा रहे हैं। सत्ता पक्ष व विपक्ष इस मुद्दे को लेकर चुप्पी साधकर बैठे हैं। ऐसा लगता है कि उन्हें मरीजों की इस समस्या से कोई भी लेना-देना नहीं है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विशाल महाजन ने बताया कि निजी अस्पताल में हिमकेयर के तहत जैसे पहले बड़े ऑपरेशन मुफ्त हो रहे थे। उसी प्रकार से दोबारा से इस व्यवस्था को सुचारू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द चंबा के मरीजों को निजी अस्पताल में भी हिमकेयर की सुविधा का लाभ मिलेगा।