चंबा। जिला चंबा में लगभग 2200 हेक्टेयर जमीन पर लगाई मक्की की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मौसम की बेरुखी से फसल मुरझाने लगी है। बीते दो सप्ताह से बारिश न होने से फसल को नुकसान पहुंच रहा है।
किसानों की आय का मुख्य साधन मानी जाने वाली यह फसल गर्मी के प्रकोप से झुलसने लगी है। किसान हर दूसरे दिन सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन इससे भी बात नहीं बन रही है। मक्की की पत्तियां झुलस चुकी हैं। किसान अब मंदिरों में पहुंच कर बारिश के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार चंबा, होली, भटियात, सलूणी, भरमौर इलाकों में किसान गेहूं की फसल काटने के बाद मक्की की फसल की बिजाई करते हैं। मक्की की फसल को किसानों की आय का एक अच्छा साधन माना जाता है। यही वजह है कि बड़े स्तर पर किसान इस फसल को उगाते हैं। दोपहर के समय पढ़ने वाली तेज धूप और उसके साथ चलने वाली गर्म हवाओं ने फसल की स्थिति बेहद खराब हालत में पहुंचा दी है। सिंचाई का भी फायदा नहीं हो रहा है। अब किसानों को पैदावार घटने का डर लगने लगा है।
किसान में राहुल कुमार, जगदेव सिंह, रविंद्र कुमार, कुनाल कुमार, लाल चंद और विनोद कुमार का कहना है कि इस समय बारिश का होना बेहद जरूरी है, क्योंकि फसलों के लिए सिंचाई का पानी पर्याप्त नहीं हो पा रहा। अगर बारिश होती है तो मौसम भी ठंडा होगा और फसलों की पत्तियों को भी पानी की फुहार मिलेगी। इससे फसल दोबारा खिल जाएगी। बारिश से फसल पर संकट के बाद मंडरा रहे हैं।
उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक कुलदीप धीमान ने कहा कि इस समय फसलों के लिहाज से बारिश का होना बहुत जरूरी है। किसानों को फसल बचाने के लिए सिंचाई लगातार करनी पड़ेगी। साथ ही किसान गर्मी के मौसम में तेज दबाव खाद का अधिक इस्तेमाल करने से बचें। उन्होंने कहा कि पहले ही गर्मी की मार से फसल मुरझा रही है। ऐसे में खाद का अधिक इस्तेमाल न करें।