भरमौर (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र भरमौर के 16 स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर ताले लटके हैं। इसकी वजह से संबंधित पंचायतों में रहने वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण प्रभावित हो रहा है। इससे कई छोटे बच्चों का कई प्रकार की बीमारियों की चपेट में आने का खतरा भी बढ़ गया है। स्वास्थ्य उपकेंद्रों में मुख्यत: नवजात बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण किया जाता है लेकिन कुछ सालों से भरमौर के 16 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में टीकाकरण नहीं किया जा रहा है। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के पास इन स्वास्थ्य उपकेंद्रों को सुचारु रूप से चलाने के लिए स्टाफ ही उपलब्ध नहीं है।
स्टाफ उपलब्ध करवाने के लिए विभाग कई बार सरकार को अवगत करवा चुका है लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से यहां स्वास्थ्य कार्यकर्ता सहित अन्य स्टाफ की तैनाती नहीं की गई है। इसके चलते ये स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद पड़े हैं। जनजातीय क्षेत्र भरमौर की 31 पंचायतों में रहने वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करवाने के लिए विभाग की तरफ से 19 स्वास्थ्य उपकेंद्र खोले गए हैं लेकिन मौजूदा समय में तीन स्वास्थ्य उपकेंद्र ही सुचारू रूप से कार्यान्वित हैं जबकि 16 स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर ताले लटके हैं। सरकार ने भरमौर उपमंडल में वलमुई, हड़सर, सटली, खंणी, गरीमा, लाहल, सियूर, डल्ली, क्वांरसी, दियोल, सामरा, ऊरेई, मांधा, तरेला, बडगाम, पूलन, चोविया, औराफाटी सहित अन्य पंचायतों में स्वास्थ्य उपकेंद्र लोगों की जरूरत के मुताबिक तो खोल दिए हैं लेकिन वहां स्टाफ की तैनाती नहीं की गई है। मात्र लाहल, सियूर और क्वांरसी स्वास्थ्य उपकेंद्र में एक-एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता व्यवस्था संभाल रहे हैं।
19 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में पुरुष और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के स्वीकृत 38 पदों में से 35 पद खाली पड़े हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा रही हैं। टीकाकरण प्रभावित होने की संभावना भी बढ़ती जा रही है।
स्वास्थ्य उपकेंद्रों में चल रही स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के खाली पदों को भरने के लिए सरकार को अवगत करवा दिया गया है। सरकार जल्द इन पदों पर तैनाती कर सकती है। -डाॅ. अंकित शर्मा, खंड चिकित्सा अधिकारी भरमौर।