चंबा। जिला चंबा के पशुओं में लंपी रोग अपने दूसरे चरण में पहुंच गया है। दूसरे चरण में इसके लक्षण में भी बदलाव आया है। पहले जहां पशुओं के पूरे शरीर में गुठली हो जाती थी तथा मुंह से लार टपकती थी, लेकिन अब नए स्टेज में पशुओं के शरीर में न तो गुठली बन रही है और न ही मुंह से लार टपक रही है। पशुओं की टांगों व पेट में सूजन हो रही है। ऐसे में बीमारी के उपचार के लिए चिकित्सकों को दिक्कत हो रही है। हालांकि विभागीय टीम लंपी की चपेट में आए पशुओं की निगरानी कर रही हैं। इसके लिए हरसंभव उपचार दिया जा रहा है। भटियात क्षेत्र में लंपी वायरस का असर कम हो रहा है। जबकि जिला में लंपी के शुरूआती मामले इसी क्षेत्र से सामने आए थे। ऐसे में भटियात क्षेत्र की पशुपालन विभाग की टीम ने कुछ राहत की सांस ली है। विभाग के मुताबिक अब अधिकतर मामले चनेड, भनौता, साच, उदयपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में सामने आए हैं।
पशुओं की मौत का आंकड़ा अब तक 400 तक पहुंच गया है। 15 अक्तूबर तक पशुओं की मौत का आंकड़ा 370 था। जिले में अब तक 29,680 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। मौजूदा समय में चंबा में 70163 पशुओं का उपचार चल रहा है जिसमें से 3,000 पशु स्वस्थ भी हो चुके हैं।
इनसेट
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक ड.ॉ लाल गोपाल ने बताया कि दूसरे चरण में लंपी रोग के लक्षण बदले है। विभाग द्वारा पशुओं की निगरानी की जा रही है। भटियात क्षेत्र में लंपी का असर कम हुआ है। उन्होंने आह्वान किया है कि पशुओं को साफ-सफाई वाली जगह में रखें।