चंबा। जिले में लंबे समय से बारिश न होने से 24,430 हेक्टेयर क्षेत्र में बीजी गई गेहूं और अन्य फसलों को करीब बीस प्रतिशत नुकसान हुआ। कृषि विभाग ने इस बार किसानों को आर्थिक तौर पर लगभग 1.67 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया है।
क्षेत्र की खेती ज्यादातर वर्षा आधारित है, इसलिए पैदावार सीधे मौसम पर निर्भर करती है। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि गेहूं की फसल की अच्छी उपज के लिए समय पर पांच बार सिंचाई करना जरूरी है। विशेष रूप से सीआरआई स्टेज, जो बिजाई के 18-25 दिन के भीतर आता है, फसल के विकास के लिए बेहद अहम माना जाता है। इस बार वर्षा न होने के कारण समय पर पानी नहीं मिल सका, जिससे फसल की बढ़ोतरी प्रभावित हुई। कृषि विभाग का कहना है कि वर्षा आधारित खेती में समय पर सिंचाई की कमी सीधे पैदावार को प्रभावित करती है। जिले में करीब एक लाख के करीब किसान है, जो कि खेतीबाड़ी पर ही निर्भर रहते हैं।
जल की बचत को उठाएं कदम : भूपेंद्र
कृषि विभाग के उपनिदेशक भूपेंद्र सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि सिंचाई, फसल सुरक्षा और जल की बचत के लिए जरूरी कदम उठाएं। मिट्टी की नमी बनाए रखने और खरपतवार कम करने के लिए फसलों पर मल्च लगाएं। सूखे या संकट की स्थिति में समय पर पानी देकर फसल बचाएं। सिंचाई के पानी का सही प्रयोग करें जल की बचत के लिए केवल आवश्यक मात्रा में पानी दें। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम अपनाएं, पानी की खपत कम करने और पैदावार बढ़ाने के लिए आधुनिक सिंचाई तकनीक का उपयोग करें। प्राकृतिक आपदाओं और नुकसान से आर्थिक सुरक्षा प्राप्त करें। मौसम संबंधी सलाह नियमित रूप से लें, समय पर मौसम अपडेट और चेतावनी देखकर फसल की योजना बनाएं। अधिक जानकारी के लिए नजदीकी कृषि कार्यालय में संपर्क करें।