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Chamba News: पांगी घाटी में 12 दिन तक होगी राजा बलि की पूजा

Fri, 09 Feb 2024 10:42 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
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चंबा के पांगी में जकारू उत्सव के दौरान पूजा के लिए रखी गई सामग्री।संवाद
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पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी में 12 दिन तक जुकारू उत्सव की धूम रहेगी। शुक्रवार को इसका आगाज हुआ। उत्सव को आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है।
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शुक्रवार मध्यरात्रि को घाटी के लोग अपने घरों की दीवारों पर राजा बलि का चित्र उकेरेंगे। इसकी प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। शाम को घर के मुखिया भरेस भंगड़ी और आटे के बकरे बनाएंगे। ये बनाते समय कोई किसी से बातचीत नहीं करता है। पूजा सामग्री अलग कमरे में रखी जाती है। रात्रिभोज के बाद गोबर की लिपाई की जाएगी। इसे स्थानीय बोली में चौका कहा जाता है। गोमूत्र और गंगाजल छिड़कने के बाद गेहूं के आटे और जौ के सत्तुओं से मंडप लिखा जाता है। इसे चीका कहते हैं।
मंडप के ऊपर राजा बलि की आटे से बनी मूर्ति की स्थापना की जाती है। इसे स्थानीय बोली में जन बलदानों कहते हैं। आटे से बने बकरे, मेंढ़े आदि मंडप में तिनकों के सहारे रखे जाते हैं। मंडप बनाने वाला राजा बलि की पूजा करता है। घाटी के बाशिंदे आटे के बकरे (चौक) तैयार कर राजा बलि को अर्पित करेंगे। धूप-दीये और चौक लगाकर 12 दिन तक राजा बलि की ही पूजा करेंगे। इस दौरान कुलदेवता से लेकर अन्य देवी-देवताओं की पूजा नहीं की जाती है। जुकारू पर्व के दूसरे दिन लोग एक-दूसरे के घरों में जाकर बड़े-बुजुर्गो का आशीर्वाद लेंगे। विशेष प्रकार के पकवान भी बनाए जाएंगे। दोस्तों और रिश्तेदारों को दावत पर बुलाया जाएगा। सदियों पुरानी इस परंपरा का निर्वहन आज भी लोग कर रहे हैं।
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दीनानाथ, मान सिंह, पवन कुमार, राज कुमार, सुरेश कुमार, विश्भर और भाग सिंह ने कहा कि पांगी में जुकारू पर्व 9 जनवरी से शुरू हो गया है। चंबा में रहने वाले पांगी वासी इसे 11 फरवरी को मनाएंगे। इस दौरान जश्न के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। लंबे समय से जुकारू उत्सव को मनाने की परंपरा बाहरी राज्यों और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बसे पांगी के लोग निभा रहे हैं। इस उत्सव को लेकर लोगों में खासा उत्साह है।
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