चंबा। जिले में हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों की खस्ता हालत लोगों की परेशानियों को बढ़ा रही है। आलम यह है कि 13 बसों को कंडम घोषित कर जसूर भेजे जाने के बाद भी रोजाना 20 से 22 बसें मरम्मत कार्य के लिए वर्कशॉप में खड़ी रहती हैं। ऐसे में समयानुसार बसों की मरम्मत न होने से जहां रूटों पर बसें समयानुसार नहीं चल पाती हैं तो वहीं दूसरी ओर कई मर्तबा अधर में ही बसों का दम फूल जाता है। कुल मिला कर निगम की खटारा बसें सवारियों के लिए जी का जंजाल बनी हुई हैं।
गौरतलब है कि हिमाचल पथ परिवहन निगम के चंबा डिपो के तहत दुर्गम क्षेत्र चंबा में 165 के करीब रूटों के लिहाज से 195 चालक सेवारत हैं। सभी रूटों को सुचारु रखने के लिए 50 से अधिक और चालकों की तैनाती अनिवार्य है। वहीं, दूसरी ओर जिले में 196 परिचालकों की तैनाती के बावजूद महज 166 रूटों पर ही परिचालक बसों के साथ जा रहे हैं। शेष परिचालक विभिन्न जगहों पर कार्यालय के कार्यों का निपटान करने के लिए तैनात हैं। आलम यह है कि निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक के कार्यालय चंबा में महज छह पदों पर स्थायी अधिकारी और कर्मचारी तैनात हैं। शेष पदों को जुगाड़ के सहारे चलाया जा रहा है। सूत्र खुलासा करते हैं कि प्रबंधन की ओर से कई मर्तबा कलपुर्जे समयानुसार नहीं पहुंच पाते हैं। इससे बसों का मरम्मत संबंधी कार्य का निपटान करने में परेशानी हो रही है।
जिले के विभिन्न रूटों पर बसों के बीच राह हांफने से सवारियों को परेशानी हो रही है। हालांकि प्रबंधन अपने स्तर पर जुगाड़ के सहारे बसें चलाने के लिए प्रयासरत है। क्षेत्रीय प्रबंधक शुगल सिंह ने बताया कि विभिन्न रूटों पर मरम्मत करवा कर बसों को भेजा जाता है। बताया कि स्टाफ की कमी के बारे में आलाधिकारियों को समय-समय पर अवगत करवा दिया जाता है।