दादा से सीखा देसी हल्दी बनाने का हुनर, घर की मेहनत को बनाया आमदनी का जरिया
भलोगी क्षेत्र में जंगल से कच्ची हल्दी जुटाकर खुद तैयार करती हैं पाउडर, गांव में करती हैं बिक्री
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जंगल में मिलने वाली हल्दी की जड़ें काजल के लिए सिर्फ एक पारंपरिक उपज नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का जरिया बन गई हैं। भलोगी क्षेत्र की काजल ने अपने दादा से सीखा देसी हल्दी तैयार करने का हुनर आजीविका से जोड़ लिया है।
जंगल और आसपास के क्षेत्रों से कच्ची हल्दी की जड़ें जुटाने से लेकर उन्हें साफ करने, सुखाने और पीसकर पाउडर बनाने तक का काम वह खुद करती हैं।
काजल ने बताया कि देसी हल्दी तैयार करने की विधि उन्होंने दादा से सीखी थी। उनका क्षेत्र दुर्गम होने के कारण यहां आज भी लोग स्थानीय और देसी उत्पादों पर काफी निर्भर रहते हैं। उन्होंने इसी पारंपरिक ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए हल्दी तैयार करने और बेचने का काम शुरू किया। मेहनत से तैयार हल्दी की गांवों में बिक्री कर वह आमदनी अर्जित कर रही हैं।
काजल की कहानी बताती है कि पहाड़ों में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों और पीढ़ियों से चले आ रहे हुनर को रोजगार से जोड़ा जाए तो घर के स्तर पर भी आय का साधन खड़ा किया जा सकता है। उनका प्रयास पारंपरिक ज्ञान को सहेजने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मिसाल पेश कर रहा है।
ऐसे तैयार करती हैं देसी हल्दी
जंगल से लाई गई कच्ची हल्दी की जड़ों को मिट्टी और गंदगी हटाकर साफ किया जाता है। इसके बाद जड़ों को अच्छी तरह सुखाया जाता है। पूरी तरह सूखने पर छोटे टुकड़े कर पीसा जाता है। पिसी हल्दी को छानकर बारीक पाउडर तैयार किया जाता है। तैयार हल्दी को सुरक्षित रखकर गांवों में बेचा जाता है।