शहरवासियों ने उठाए सवाल, बोले- बार-बार अधूरा रह रहा शहर का सर्वेक्षण
सर्वे की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। नगर परिषद का गृहकर सर्वे पिछले पांच साल में कई बार शुरू हुआ लेकिन हर बार अधूरा रह गया। अब उसी अधूरे आंकड़ों के आधार पर शहरवासियों के घरों पर बढ़े हुए कर का बोझ डाल दिया गया है।
कहीं पहले कम कर का लाभ मिल रहा था तो कहीं नए आकलन में राशि दोगुनी हो गई। नतीजा यह कि परिषद का राजस्व भी संतुलित नहीं हो पाया और आम परिवारों की मासिक बजट पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया। शहरवासियों ने नगर परिषद के सर्वे की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सर्वे की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि नगर परिषद की ओर से वर्ष 2020 के बाद से गृहकर का सर्वे सही तरीके से नहीं करवाया गया है। इससे नगर परिषद के राजस्व को नुकसान हो रहा है तो दूसरी ओर शहरवासियों पर अचानक कर का बोझ बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि पहले कई मकान मालिकों को कम गृहकर आता था, अब नए आकलन के नाम पर इसमें भारी बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सर्वेक्षण प्रक्रिया कई बार शुरू हुई लेकिन तकनीकी खामियों, स्टाफ की कमी और आपत्तियों के चलते अधूरी रह गई। नगर परिषद को शहर में संपत्तियों का दोबारा सर्वे करना चाहिए जिससे वास्तविक आंकड़ों के आधार पर गृहकर तय किया जा सके। साल 2020 के बाद सर्वे पूरी तरह संपन्न नहीं हो पाया। कई क्षेत्रों में आधा-अधूरा डाटा दर्ज हुआ जिससे कर निर्धारण में असमानता सामने आई। जहां कुछ लोगों को पहले कम कर का लाभ मिलता रहा, अब संशोधित आकलन में कई मकान मालिकों का गृहकर दोगुना हो गया है।
पहले हमारा गृहकर बहुत कम आता था। अब अचानक हाउस टैक्स राशि बढ़ा दी गई है। जब सर्वे पूरा ही नहीं हुआ तो इतना अंतर कैसे आ गया। - शिवानी, शहरवासी
सर्वे टीम हमारे वार्ड में दो बार आई लेकिन दोनों बार काम अधूरा छोड़ दिया गया। अब बढ़ा हुआ कर देना पड़ रहा है जो आम परिवारों के लिए मुश्किल है। - मधु बाला, शहरवासी
नगर परिषद को पहले सर्वे प्रक्रिया पारदर्शी और पूर्ण करनी चाहिए थी। अधूरे आंकड़ों के आधार पर कर बढ़ाना जनता के साथ अन्याय है। - महेश मोंटी, शहरवासी
नगर परिषद की वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी राखी कौशल का कहना है कि इस बारे निदेशालय से चर्चा की जाएगी। जल्द समस्या का समाधान निकाला जाएगा।