उपमंडल के की कई पंचायतों में इस बार सेब पेड़ों में ही खराब होने से बागवानों को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्षेत्र की खणी और गरिमा पंचायत समेत दूसरे इलाकों में सेब की फसल खराब हो गई है। कीड़ा लगने की वजह से सेब अंदर से सड़ा हुआ निकल रहा है। इस कारण बागवान तुड़ान के बाद सेब को खुले में फेंकने के लिए मजबूर हैं।
बागवानों का कहना है कि सेब बाहर से बिलकुल साफ हैं, लेकिन जब इन्हें काटा जा रहा है तो अंदर कीड़े और दाग निकल रहे हैं। सेब की फसल उठाने आए कई व्यापारी सेब को वहीं छोड़कर वापस जा रहे हैं। इस कारण बागवान हताश हैं। बागवानों का कहना है कि पहले बारिश ने बागवानों को परेशान किया, अब खराब फसल ने निराश कर दिया है। स्थानीय बागवानों ने इस संबंध में विभाग से हस्तक्षेप की मांग की है। बागवानों बर्फी राम, राकेश, सोनू, घिंद्र, सरदारी, अश्वनी कुमार और अनिल कुमार ने बताया कि मणिमहेश यात्रा के दौरान भरमौर का काफी सेब बिक जाता है। बागवानों को सेब सिर्फ सड़क तक लाना होता है, लेकिन इस बार सेब की फसल बेहद खराब निकल रही है। इस बार सेब का उत्पादन भी कम हुआ था, इस कारण रेट भी ठीक मिले रहे थे। ऐसे में सेब को बीमारी लगने की वजह से अब इसकी बिक्री पर ब्रेक लग गई है। उन्होंने विभाग से आह्वान किया है कि मामले की जांच करें और बागवानों को राहत पहुंचाने का प्रयास करें।
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विभाग करे बीमारी की जांच : संघ
फल फूल एवं सब्जी उत्पादक संघ भरमौर के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने बताया कि पहले इस साल मौसम ने दगा दे दिया। इससे भरमौर में 70 प्रतिशत सेब की फसल को नुकसान पहुंचा था। अभी जो फसल तैयार हुई है उसे बागवान बेचने जा रहे हैं तो सेब के अंदर कीड़े निकलने की वजह से उनके सपने टूट गए हैं। उन्होंने अज्ञात बीमारी के संबंध में विभाग से जांच की मांग की है।
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विभाग करेगा निरीक्षण : एसएमएस
बागवानी विभाग के एसएमएस दौलत राम वर्मा का कहना है कि वे मौके पर जाकर फलों का मुआयना करेंगे। जिन बागवानों के सेब को नुकसान हुआ है वे खुद भी सैंपल उन्हें सौंपे। विभाग समय रहते बीमारी का उपचार करेगा, ताकि बागवानों को भविष्य में नुकसान न उठाना पड़े।