चंबा। रैबीज एक जूनोटिक वायरल संक्रमण जानलेवा बीमारी है। इसका इलाज एंटी रैबीज वैक्सीन से ही संभव है। कुत्ते के काटने के तुरंत बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लेने से बीमारी से बचाव संभव है। यह बात जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हरित पुरी ने रेबीज और सांप के काटे जाने के इलाज पर आयोजित एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कही। प्रशिक्षण के दौरान चंबा मेडिकल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. संजय कश्यप ने प्रशिक्षुओं को जानवरों के काटे जाने पर विभिन्न श्रेणियों के घावों के प्रबंधन के बारे में बताते हुए कहा कि जब भी कुत्ता काटे तो साफ पानी और साबुन से घाव को अच्छी तरह धोयें।
इससे 99 प्रतिशत रेबीज वायरस से बचाव होता है और शीघ्र ही स्वास्थ्य संस्थान में जाकर एआरवी के तीन टीके पहले-तीसरे और सातवें दिन लगवाकर बीमारी से बचा जा सकता है। सांप के काटने से बचने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को चाहिए कि वे रात के अंधेरे में बाहर न निकलें, जमीन पर न सोएं और खेतों में काम करते समय पूरे कपड़े पहनें। उन्होंने कहा कि सांप के काटे जाने पर झाड़ फूंक करवाने की बजाय एंटी स्नेक वीनम अवश्य ही लगवाएं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्सिस और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।