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Chamba News: रैंप वॉक ने मोह लिया सबका मन, गद्दी ड्रेस में नृत्य से मचाया धमाल

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डलहौजी (चंबा)। पर्यटन नगरी डलहौजी में चल रहे विंटर कार्निवल 2025 की चौथी सांस्कृतिक संध्या पर रविवार को हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक संस्कृति और कला का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस कार्यक्रम में दर्शकों को विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और परंपराओं से जुड़ी विशेष प्रस्तुतियां देखने को मिलीं।
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विंटर कार्निवल की चौथी संध्या में हिमाचली परिधानों में रैंप वॉक और गद्दी परिधान में नृत्य प्रमुख आकर्षण रहे। विशेषकर एक नन्ही बच्ची ने गद्दी परिधान पहनकर पुरानी हिमाचली संस्कृति से जुड़ा नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित दर्शकों का दिल छू लिया। इस प्रदर्शन के दौरान बच्ची ने अपनी नृत्य कला के माध्यम से हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को जीवित किया, जिससे दर्शक भावुक हो उठे और उनकी सराहना की।
चौथी सांस्कृतिक संध्या में उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने चलो चंबा अभियान का कैलेंडर भी लांच किया, जो चंबा के पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय संस्कृति की पहचान को और मजबूत करने के लिए एक अहम पहल है।
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इस कार्यक्रम में एसडीएम डलहौजी अनिल भारद्वाज सहित कई अन्य अधिकारी और गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। इनकी उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी ऐतिहासिक बना दिया। इस दाैरान लोगों ने कहा कि चौथी सांस्कृतिक संध्या ने यह साबित किया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम सिर्फ मनोरंजन नहीं होते बल्कि ये हमारे इतिहास, धरोहर और परंपराओं से जुड़ने का एक शानदार तरीका होते हैं। इस प्रकार के आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देते हैं बल्कि युवाओं को अपनी संस्कृति के प्रति गर्व और सम्मान भी सिखाते हैं।
पर्यटन के दृष्टिकोण से आकर्षण
विंटर कार्निवल में आयोजित पारंपरिक परिधानों में रैंप वॉक को देख पर्यटक काफी खुश हुए। यह वॉक हिमाचल प्रदेश की विविध सांस्कृतिक धारा को प्रदर्शित कर रहा था, जिसमें युवतियों ने विभिन्न पारंपरिक परिधानों में रैंप पर चलकर राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को प्रस्तुत किया। रैंप वॉक को देखकर दर्शकों ने न केवल सांस्कृतिक विविधता का अनुभव किया, बल्कि यह भी महसूस किया कि कैसे इन परिधानों और पारंपरिक कला रूपों को सही तरीके से संरक्षित किया जा सकता है। इसके अलावा, कार्यक्रम में हिमाचली गीतों पर नृत्य का आयोजन भी हुआ, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने दर्शकों को जमकर नचाया। इस कार्यक्रम में पारंपरिक संगीत और नृत्य ने एक नई ऊर्जा भर दी और सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।
सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण
यह आयोजन डलहौजी और चंबा क्षेत्र में पारंपरिक कला रूपों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल स्थानीय लोगों को अपनी संस्कृति से जोड़ना है, बल्कि बाहर से आए पर्यटकों को भी हिमाचल की संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना है।
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