सिहुंता (चंबा)। भटियात विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में लोग दूसरे जिलों या राज्यों में पलायन करने पर मजबूर हैं। पीएचसी सिहुंता और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र समोट में चिकित्सीय स्टाफ से लेकर विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद लंबे अरसे से रिक्त हैं।
अस्पतालों में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड तक की सुविधा नहीं हैं। लोगों को छोटी से छोटी बीमारी, प्रसव या अन्य बीमारियों का उपचार करवाने के लिए 40 से 80 किमी दूर टांडा या पठानकोट जाना पड़ता है। कहने को तो चुवाड़ी में सिविल अस्पताल है, लेकिन यहां चिकित्सीय समेत अल्ट्रासाउंड तक की सुविधा नहीं है। इसका खामियाजा क्षेत्र की 25 पंचायतों की 50 हजार की आबादी को उठाना पड़ रहा है। पीएचसी सिहुंता और सीएचसी समोट में मरीजों के लिए दो-दो बेड ही हैं।
परिचर्चा
भटियात विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं लचर हो चुकी हैं। अस्पताल में ह्दय रोगियों को यहां से रेफर करने पर वे बीच राह ही दम तोड़ देते हैं। यहां स्वास्थ्य समेत अन्य सुविधाओं का होना अनिवार्य है। - कुलभूषण उपमन्यु, पर्यावरणविद कामला
स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के उन्नत साधनों के अभाव में पुश्तैनी जमीन छोड़कर चंबा-कांगड़ा की सरहद पर घर बनाना पड़ा है। यहां कोई भी सरकार अभी तक ग्रामीणों की मांगों को पूरा करने में सफल तक नहीं हो पाई है। - चंडीदत्त शर्मा, सेवानिवृत्त अध्यापक
स्वास्थ्य सेवाओं का टोटा ग्रामीणों पर भारी पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और चोटिल होने वाले लोगों को बाहरी जिलों और राज्यों का रुख करना पड़ रहा है। यह सुविधा यहां मिल जाए तो लोगों की जान बच सकती है। - कैप्टन पुरुषोत्तम, सेवानिवृत्त सैनिक
किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए उस इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर होना बेहद जरूरी है। भटियात क्षेत्र में इससे उलट हो रहा है। यहां स्वास्थ्य सेवाएं न के बराबर हैं। लोगों को मजबूरन बाहर जाना पडृ रहा है। - किशन देव, सेवानिवृत्त, डीएफएससी।
बीएमओ समोट डॉ. श्याम ने बताया कि सीएचसी में वर्तमान में छह बिस्तर लगाए गए हैं। इसमें गर्भवतियों के प्रसव करवाए जाते हैं। बताया कि 30 बिस्तरों के प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए भेजा गया है। बताया कि ओपीडी पहले की अपेक्षा बढ़कर 150 तक पहुंच गई है।