चुवाड़ी में नाग देवता भाइयों को मिलन। संवाद
चुवाड़ी (चंबा)। चुवाड़ी क्षेत्र की आस्था का प्रतीक नाग मंडौर मंदिर मंगलवार शाम श्रद्धालुओं की भीड़ और जयघोषों से गूंज उठा। नाग बिनतरु महाराज अपने गूरों और साजो-सामान के साथ प्रियुगल मंदिर से कुठेड़ पहुंचे, जहां नाग मंडौर महाराज के साथ उनका मिलन हुआ। नाग बिनतरु महाराज का यह आगमन तीसरी जातर के अवसर पर हुआ। परंपरा के अनुसार चुवाड़ी के लोग नंगे पांव प्रियुगल तक जाते हैं और वहां से नाग महाराज को लेकर आते हैं। इस यात्रा में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बड़ी श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाग बिनतरु महाराज को चंबा के राजा की कुल-देवता परंपरा से भी जोड़ा जाता है। परंपरा में पांच भाई नागों की मान्यता है, इनमें सबसे बड़े सुंडल नाग, नाग मंडौर महाराज, खज्जी नाग (खज्जियार में विराजमान), नाग बिनतरु महाराज और नाग शतराड़ महाराज हैं। जातर मेले में नाग मंडौर और नाग बिनतरु महाराज के गूर न केवल इलाके की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद देते हैं, बल्कि श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं को लेकर भविष्यवाणियां भी करते हैं। जातर के दौरान हर शाम को शाम 5:00 बजे नाग महाराज के गूर नृत्य करते हैं और शाम 7:00 बजे आरती संपन्न होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
चुवाड़ी में नाग देवता भाइयों को मिलन। संवाद