बंदूकें होने के बावजूद नहीं कर सकते इस्तेमाल
सरकार सुविधा के लिए नियम का करे प्रावधान
संवाद न्यूज एजेंसी
भरमौर (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र भरमौर में किसान-बागवान भालुओं के आतंक से काफी परेशान हैं। भालू खेतों और बगीचों में घुसकर उनकी फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बागवान-किसान चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए भले ही इन किसानों के पास बंदूकें हैं लेकिन, भालुओं को भगाने के लिए वे अपनी बंदूकों का इस्तेमाल भी नहीं कर पा रहे हैं। सरकार ने वर्ष 2011 में भालू को फसलों को हानि पहुंचाने वाले जंगली जानवरों की श्रेणी से बाहर निकाल दिया है। फल एवं सब्जी उत्पादक संघ भरमौर के प्रधान मोती राम शर्मा ने बताया कि जनजातीय क्षेत्र के लोगों का मुख्य व्यवसाय बागवानी और किसानी ही है। ऐसे में उनकी फसलों को भालुओं से बचाना भी काफी जरूरी है। वर्ष 2011 से पहले किसान-बागवान भालुओं को भगाने के लिए अपनी बंदूकों का इस्तेमाल कर सकते थे लेकिन, अब वे ऐसा नहीं कर सकते। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जिस प्रकार से बंदरों से राहत पाने के लिए सरकार ने किसानों को सुविधा प्रदान की है, उसी प्रकार भालुओं के हमले से बचाव को लेकर भी उचित प्रावधान किया जाए।