विधानसभा में अपने क्षेत्र की बात रखते भरमौर विधायक डॉ0 जनक राज।स्रोत जागरूक पाठक
चंबा। वन विभाग की सख्ती के कारण भेड़ पालकों को अपना पारंपरिक व्यवसाय चलाना मुश्किल हो गया। विभाग ने चारागाहों को सीमित करके बाड़बंदी कर दी है। भेड़ पालकों के चालान काटे जा रहे हैं। कुछ कर्मचारी लेने - देने की बात करके राहत देने की डिमांड भी रख रहे हैं। इससे भेड़ पालक काफी परेशान हैं। यह बात भरमौर विधायक डॉ. जनकराज ने विधानसभा के सत्र में अपने संबोधन में कही।
उन्होंने कहा कि धारों पर भेड़-बकरियां सिर्फ घास खाती हैं। उनके चुनाव क्षेत्र से 748 लोग भेड़ पालक व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, जिन्हें सर्दियों में प्रवास के दौरान अपने पशुधन की चोरी की समस्या से गुजरना पड़ रहा है। सात दिन में उनके पास भेड़ पालकों की कई शिकायतें पहुंची है कि नूरपुर के पास उनकी भेड़ें चोरी हुई हैं। इसके साथ अन्य स्थानों पर भी उनकी भेड़-बकरियां चोरी की जा रही हैं। जब इस बात को लेकर उन्होंने पुलिस प्रशासन को अवगत करवाया तो इसमें कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जो कि एक चिंता का विषय है। इसमें सदन को सख्त कार्रवाई अमल में लानी चाहिए।
उन्होंने कि इस बार भेड़ पालकों को प्रवास के दौरान मवेशियों को विभिन्न बीमारी से बचाने के लिए जो दवाई दी जाती है, वह भी नहीं दी गई है। उन्होंने जिले में बाहरी राज्यों से बेचने के लिए लाई जा रही भेड़-बकरियों को लेकर भी चिंता जाहिर की है। इससे भी भेड़ पालकों का पारंपरिक व्यवसाय खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। इसलिए सरकार को इस दिशा में भी उचित कदम उठाने की जरूरत है।