चंबा। चुराह वन मंडल में 14 लाख रुपये के गबन के मामले में संबंधित वन विभाग के कर्मचारियों पर जल्द गाज गिर सकती है। वन मंडलाधिकारी ने मामले की जांच लगभग पूरी कर ली है।
वन प्रबंधन समिति और बचे हुए संबंधित वन कर्मचारियों के बयान लिए जा रहे हैं। अगले सप्ताह तक यह जांच पूरी हो जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट मुख्य वन अरण्यपाल को सौंपी जाएगी। यहां से मामले में संलिप्त कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, इस मामले में वन मंडलाधिकारी प्रारंभिक रिपोर्ट बनाकर पहले ही मुख्य वन अरण्यपाल को सौंप चुके हैं।
उन्होंने वन खंड अधिकारी को वन प्रबंधन समिति के प्रधान के हस्ताक्षर बदलकर बैंक खाते से 14 लाख निकालने में आरोपी पाया है। हिमाचल प्रदेश फोरेस्ट ईको सिस्टम क्लाइमेट प्रूफिंग प्रोजेक्ट के तहत गठित वन प्रबंधन समिति के प्रधान को बदलकर वन खंड अधिकारी ने पहले नया प्रधान बनाया। उसके बाद बैंक में समिति के खाते से पुराने प्रधान के हस्ताक्षर बदलकर नए प्रधान के हस्ताक्षर करवाकर 14 लाख रुपये निकाले। बैंक में चार खातों में से तीन खातों में पुराने ही प्रधान के हस्ताक्षर रहने दिए। इससे साफ जाहिर होता है कि वन खंड अधिकारी ने पैसों का गबन करने के लिए ही पुराने प्रधान के हस्ताक्षर बैंक में बदलाए।
इस गड़बड़ी की जांच पूरी होने के बाद अन्य वन विभाग के कर्मचारी भी बेनकाब हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार बैंक से निकाले गए पैसे विभाग के अन्य कर्मचारी के खाते में डाले गए हैं। फिलहाल, अभी तक विभाग ने इसको लेकर खुलासा नहीं किया है। इसका खुलासा जांच रिपोर्ट पूरी होने के बाद हो सकता है। फिलहाल, इस गड़बड़ी की जांच के चलते संबंधित वन विभाग के कर्मचारियों के हाथ पांव फूल रहे हैं।
वन मंडल अधिकारी चुराह सुशील कुमार गुलेरिया ने बताया कि बैंक में वन प्रबंधन समिति के प्रधान के हस्ताक्षर बदलकर 14 लाख निकालने के मामले में जांच प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। कुछ कर्मचारियों व समिति के सदस्यों के बयान लेना बाकी है। इनके बयान लेकर जांच रिपोर्ट बनाकर अगले सप्ताह मुख्य वन अरण्यपाल को सौंप दी जाएगी। वही मामले में आगामी फैसला सुनाएंगे।