सिहुंता, कामला और समोट में धान की कटाई तेज, कम पैदावार की आशंका से किसान चिंतित
बारिश की आशंका के बीच बची हुई फसल को समेटने की जद्दोजहद में जुटे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
सिहुंता (चंबा)। खेतों में धान पककर तैयार है, लेकिन किसानों के लिए इस बार फसल समेटना किसी चुनौती से कम नहीं है। पहले ओलावृष्टि ने फसल को नुकसान पहुंचाया, फिर लावारिस पशुओं और जंगली सुअरों ने खेतों में खड़ी उपज को प्रभावित किया।
अब बारिश की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सिहुंता, कामला और समोट क्षेत्र में किसान बची हुई फसल को जल्द काटकर सुरक्षित करने में जुटे हैं।
धान की कटाई शुरू होते ही खेतों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। किसान परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर फसल काट रहे हैं, ताकि महीनों की मेहनत से तैयार उपज को मौसम की मार से बचाया जा सके। किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। उन्हें डर है कि कटाई के दौरान बारिश हुई तो खेतों में पड़ी फसल को नुकसान पहुंच सकता है।
किसान अशोक कुमार, कुलभूषण उपमन्यु, किशन चंद, माधो राम, भीम सिंह और कर्म चंद ने बताया कि इस बार खेती का पूरा सीजन चुनौतियों भरा रहा है। ओलावृष्टि से धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। वहीं, लावारिस पशुओं और जंगली सुअरों ने भी खेतों में खड़ी फसल को बर्बाद किया है। इससे उत्पादन घटने की आशंका है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में दिन-रात मेहनत की, लेकिन प्राकृतिक आपदा और पशुओं के आतंक ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब उनकी कोशिश खेतों में बची उपज को जल्द घर तक पहुंचाने की है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि पक चुकी धान की फसल की कटाई समय पर पूरी करें। कटी हुई फसल को बारिश से बचाने के लिए उचित प्रबंध करें, ताकि उपज खराब न हो और नुकसान को कम किया जा सके।