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Chamba News: भवनों और रास्तों के नीचे दब गए आग बुझाने के इंतजाम

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चंबा शहर।संवाद
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चंबा। ब्रिटिश काल में शहर को आग से बचाने के लिए बनाई गई हाईड्रेंट व्यवस्था आज के समय में लगभग खत्म हो चुकी है। शहर में विभागीय गिनती के लिए तो 113 हाइड्रेंट पंजीकृत हैं लेकिन मौजूदा समय में शहर में मात्र 13 हाइड्रेंट ही कार्य कर रहे हैं। अन्य हाईड्रेंट लोगों के घरों और रास्तों के नीचे दबे पड़े हैं जिन्हें ढूंढना दमकल और जलशक्ति विभाग के लिए अब मुमकिन नहीं है। ऐसे में शहर को आग से बचाने की व्यवस्था पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। शहर में हल्की आग की चिंगारी बड़ी तबाही मचा सकती है। इसके प्रमाण शहर में पहले भी देखने को मिल चुके हैं। शहर की तंग गलियों में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का पहुंचना मुश्किल है। इसके चलते शहर को आग से महफूज रखने के लिए ब्रिटिश काल में भी हाईड्रेंट प्रणाली को प्राथमिकता दी गई थी। मौजूदा समय में भी शहर में आग की घटना होने पर हाईड्रेंट के पानी से आग पर काबू पाया जाता है लेकिन 100 हाइड्रेंट ऐसे हैं जिनके बारे में दमकल विभाग के पास कोई जानकारी ही नहीं है। ये हाईड्रेंट किस स्थान पर लगे हैं इसको लेकर भी कोई अतापता नहीं है।
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पुराने हाइड्रेंटों को खोजने के लिए पिछले वर्ष दमकल व जल शक्ति विभाग की तरफ से अभियान चलाया गया था। इस अभियान में कई हाइड्रेंट मिले जो लोगों के घरों के नीचे दब चुके थे। ऐसे में वहां पर हाइड्रेंट की दोबारा व्यवस्था नहीं की जा सकी। शहर में हाइड्रेंट की नई व्यवस्था करने के लिए दमकल विभाग ने जलशक्ति विभाग को प्रस्ताव बनाकर भेजा है। इस प्रस्ताव को जलशक्ति विभाग ने स्वीकृति के लिए सरकार को भेज दिया है। सरकार से अनुमति मिलने पर शहर में हाईड्रेंट प्रणाली को विकसित किया जाएगा। फिलहाल शहर में हाइड्रेंट प्रणाली की व्यवस्था नाम मात्र ही है।
जिला फायर अधिकारी राकेश ठाकुर ने बताया कि शहर में 113 हाईड्रेंट पंजीकृत हैं। इसमें मात्र 13 हाइड्रेंट ही सही तरीके से कार्य कर रहे हैं। ब्रिटिश काल में शहर में लगे हाईड्रेंट दब चुके हैं। शहर में नई हाईड्रेंट व्यवस्था करने के लिए जल शक्ति विभाग को प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया है।
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