सुख आश्रय योजना के करीब 20 बच्चों की फीस लंबित, निजी संस्थानों ने परीक्षा में बैठाने से किया इन्कार
अगले महीने होनी हैं परीक्षाएं, सरकारी प्रक्रिया और शिक्षण संस्थानों के बीच फंसा विद्यार्थियों का भविष्य
पंकज सलारिया
चंबा। जिन अनाथ और अर्द्धअनाथ बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा सरकार ने उठाया, अब उन्हीं बच्चों की परीक्षा फीस के फेर में फंसती नजर आ रही है।
मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना में पंजीकृत करीब 20 विद्यार्थियों की नर्सिंग सहित अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस अब तक जमा नहीं हो पाई है। आगामी माह परीक्षाएं प्रस्तावित हैं और निजी शिक्षण संस्थानों ने बकाया फीस जमा न होने पर विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठाने से रोकने की बात कही है।
यानी जिन बच्चों के लिए सरकार ने पढ़ाई का खर्च उठाकर उनके भविष्य को संवारने का जिम्मा लिया है, वे इस समय परीक्षा में बैठ पाएंगे या नहीं, इसी चिंता में हैं। विद्यार्थियों के अनुसार फीस जमा न होने की स्थिति में संस्थानों की ओर से उन्हें परीक्षा में शामिल नहीं करने की बात कही जा रही है। परीक्षा सिर पर होने के कारण बच्चों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
विद्यार्थियों का कहना है कि फीस भुगतान उनके हाथ में नहीं है। योजना के तहत उनकी शिक्षा का खर्च सरकार की ओर से वहन किया जाना है। ऐसे में सरकारी प्रक्रिया पूरी होने में देरी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। यदि समय पर फीस जमा नहीं हुई तो पढ़ाई के साथ-साथ परीक्षा भी प्रभावित होने का डर है।
निजी शिक्षण संस्थानों का तर्क है कि बकाया फीस के बिना शिक्षण व्यवस्था संचालित करना मुश्किल है। दूसरी ओर विद्यार्थी सरकारी विभाग और संस्थानों के बीच फंसे हुए हैं। सवाल यह है कि फीस भुगतान में देरी के कारण यदि कोई विद्यार्थी परीक्षा से वंचित होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना का उद्देश्य अनाथ और अर्द्धअनाथ बच्चों को शिक्षा, आवास, आर्थिक सहायता और बेहतर भविष्य के अवसर उपलब्ध करवाना है। ऐसे में फीस भुगतान में देरी का मामला योजना के क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी कमल किशोर शर्मा ने बताया कि कुछ विद्यार्थियों की फीस जमा की जानी है। इस संबंध में जिला बाल संरक्षण इकाई को निर्देश दिए जाएंगे और बिना विलंब फीस जमा करवाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।