चंबा। जिला मुख्यालय के साथ लगती करीब चार पंचायतों में अब खेती घाटे का सौदा बनकर रह गई है। किसानों को आमदनी होना तो दूर बुआई का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। किसानों का कहना है कि लावारिस पशुओं के साथ बंदर उनकी फसलाें को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पिछले करीब दो साल से क्षेत्र में बंदरों की संख्या काफी बढ़ी है।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत उदयपुर, कियाणी, करियां, भड़ियांकोठी में किसान बंदरों के आतंक से परेशान हैं। दुनी चंद, राकेश कुमार, राज सिंह, बिट्टू राम, अमरीश कुमार, लोकेंद्र सिंह, जीवन सिंह, संदीप कुमार और सतीश कुमार ने कहा कि फसलाें को बचाने के लिए उन्हें पूरा दिन पहरा देना पड़ रहा है। बावजूद इसके बंदरों का आतंक कम होता नहीं दिख रहा है। हाल ही में मक्की की फसल की कटाई की है। बंदरों के आतंक के चलते तीस प्रतिशत पैदावार कम हुई है। बताया कि इस बारे में वे कई बार प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग कर चुके हैं, मगर अभी तक कोई समाधान नहीं हो पाया है।
कृषि उपनिदेशक डॉ. कुलदीप धीमान ने कहा कि सोलर फेंसिंग के जरिये किसान फसलों को लावारिस पशुओं के आतंक से बचा सकते हैं। सरकार इस योजना के तहत अनुदान भी दे रही है।