सिहुंता (चंबा)। विधानसभा क्षेत्र भटियात की कामला पंचायत में 70 प्रतिशत किसानों ने खेतीबाड़ी छोड़ दी है। इस कारण भूमि बंजर पड़ने लगी है।
ये किसान पहले बासमती चावल की खेती करते थे तो अपने उपयोग के उपरांत बाहरी जिलों में भी इसका निर्यात करते थे। बताया कि अब जमीन भी बंजर होने के कारण अनाज के लिए डिपुओं और दुकानों पर निर्भर हो गए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में लावारिस पशुओं की तादाद बढ़ती जा रही है। ये मवेशी फसलों को चट कर जाते हैं।
किसानों ने कहा कि तेज धूप में कड़ी मेहनत के बाद लावारिस पशु फसलों को नुकसान पहुंचा जाते हैं। हर वर्ष हजारों रुपये के नुकसान से उन्होंने अब खेतीबाड़ी करना ही बंद कर दिया है। ग्राम पंचायत कामला में 46 हेक्टेयर भूमि पर 150 किसानों ने खेती करना छोड़ दिया है। इससे यह उपजाऊ भूमि बंजर बन गई है। पशुओं को लावारिस छोड़ने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने से किसानों में सरकार और प्रशासन के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है। कहा कि क्षेत्र में लावारिस पशुओं के झुंड यहां घूमते रहते हैं। इसमें खास बात यह थी कि कामला पंचायत की भूमि में बासमती चावल, धान की फसल काफी प्रचलन में रह चुकी है।
किसानों में कर्म चंद, सुरजीत सिंह, चमेल सिंह, कमलदेव, चुनी लाल, सुरेंद्र कुमार, शक्ति चंद, बलदेव सिंह, सुंदर सिंह, बंशी लाल और धर्म चंद ने कहा कि लावारिस पशुओं की वजह से उन्होंने अब खेती करनी छोड़ दी है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि लावारिस पशुओं की समस्या के निजात के लिए स्थायी नीति बनाई जाए। कहा कि अगर गोसदन का निर्माण हो जाए और किसानों को लावारिस पशुओं से निजात मिल जाए तो वे खेती दोबारा कर सकते हैं।
ग्राम पंचायत कामला की प्रधान अनुराधा का कहना है कि क्षेत्र में लावारिस पशु की काफी तादाद है। अगर किसान अपनी कुछ भूमि पंचायत के नाम करते हैं तो गोदसन निर्माण के लिए उचित प्रयास किए जाएंगे।