चंबा। वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अब वान के वृक्षों को खतरनाक कीटों से बचाएंगे। कीटों को रात और दिन में कैसे पकड़ा जा सकता है, इसके बारे में वन अधिकारियों और कर्मचारियों को विस्तार से जानकारी दी गई। हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान पर्यावरण एवं जलवायु मंत्रालय भारत सरकार की तरफ से यह प्रशिक्षण दिया गया। इसमें वन अनुसंधान के वैज्ञानिक डॉ. मनोज राणा ने बताया कि वन अधिकारियों और कर्मचारियों को बताया गया कि वान के वृक्ष को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को दिन के उजाले में पकड़ने के लिए एक सड़ी हुई लकड़ी का टुकड़ा लेकर वृक्ष के पास रखें। उस टुकड़े को खाने के लिए कीट टूट पड़ेंगे। इस दौरान उन्हें पकड़ा जा सकता है। इसके अलावा रात के अंधेरे में वृक्ष के पास लैंप जलाकर भी उन्हें पकड़ा जा सकता है क्योंकि लैंप की लाइट की तरफ कीट काफी तेजी के साथ आकर्षित होते हैं और लाइट के साथ चिपके रहते हैं। वैज्ञानिकों ने अधिकारियों और कर्मचारियों को कीटों के बारे में यह जानकारी चुराह वन मंडल में वन अनुसंधान की तरफ से किए गए अध्ययन के आधार पर दी। पिछले डेढ़ वर्ष से अनुसंधान के वैज्ञानिक चुराह में वान के वृक्षों को कीटों से पहुंच रहे नकसान को लेकर अध्ययन कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने इस बात का भी पता लगाया कि इन कीटों को किस प्रकार से पकड़ा जा सकता था। इसी अध्ययन के अनुभव के आधार पर वैज्ञानिकों ने वन विभाग के कर्मचारियों को वान के वृक्षों को कीटों से बचाने के बारे में प्रशिक्षित किया। शिविर में उपमंडल अधिकारी सलूणी डॉ. स्वाति गुप्ता, वन मंडल अधिकारी चुराह सुशील गुलेरिया विशेष रूप से मौजूद रहे।