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चंबा में बिजली बिल 2020 व निजीकरण के मामले पर यूनियन के पदाधिकारी गरजे

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चंबा। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों ने बिजली बिल 2020 और निजीकरण के विरोध में जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके साथ ही सरकार से मांग की है कि यूनियन की मांगों को प्रमुखता के आधार पर पूरा किया जाए। बिजली बोर्ड कर्मियों ने मंगलवार को जिला मुख्यालय और डलहौजी में प्रदर्शन किए।
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प्रदर्शन के दौरान मौजूद प्रदेश मुख्य सलाहकार अनिल वर्मा, राज्य सह सचिव मुकेश कुमार, जिला संगठन सचिव सुरेंद्र शर्मा, यूनियन प्रधान दरबारी लाल, सचिव प्रताप चंद, वित्त सचिव अरुण कुमार, कोटी इकाई सचिव अंबिका प्रसाद और कालीचरण ने मांगों को लेकर नारेबाजी की।
यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि बिजली कर्मचारी और इंजीनियर की राष्ट्रीय समन्वयक नीति के आह्वान पर बिजली कानून 2003 में संशोधन करने, कोयला खाद्यान्न, ओडिसा, उत्तर प्रदेश और केंद्र शासित राज्यों में बिजली बोर्ड के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों में रोष है।
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प्रदर्शन के दौरान जिले के बिजली कर्मचारियों ने एक मत से बिजली बिल 2020 का विरोध किया। वहीं, देश में चल रही निजीकरण की सरकारी नीतियों के खिलाफ भी नाखुशी जाहिर की। यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार बीमा, बैंकिंग, बीएसएनएल, रेलवे के अलावा बिजली क्षेत्र का निजीकरण कर रही है।
उन्होंने बताया कि यूनियन बिजली संशोधन बिल और निजीकरण का पहले से ही विरोध कर रही है। मगर सरकार यूनियनों के विरोध प्रदर्शन के बावजूद निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने बताया कि देश भर में 18 राज्यों ने इसका विरोध किया गया है। हालांकि केंद्र सरकार ने हिमाचल सरकार से भी इस मामले पर अपनी राय मांगी थी।
मगर प्रदेश सरकार ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार विभिन्न क्षेत्रों के निजीकरण पर तुली हुई है। इसका वे कड़ा विरोध करते है। उन्होंने प्रदेश सरकार से भी आग्रह किया है कि वे भी निजीकरण के खिलाफ रहे।
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