चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा में वर्तमान समय में कोरोना संक्रमितों और सामान्य मरीजों के एक ही ईसीजी (इलैक्ट्रोकार्डियोग्राफी) मशीन से टेस्ट हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ तल की दूसरी ईसीजी मशीन खराब हो जाने से ही ये नौबत पेश आई है। ऐसे में यहां ये कहना उचित रहेगा कि जिला की साढ़े पांच लाख की आबादी का स्वास्थ्य रामभरोसे ही है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन के अधिकारी खराब मशीन को जल्द ठीक होने सहित दो और ईसीजी मशीनों को मंगवाने की बात कह रहे हैं। खैर, वर्तमान समय में मेडिकल कॉलेज चंबा में उपचाराधीन मरीजों व संक्रमित मरीजों के ईसीजी करने के लिए भी प्रबंधन के पास कोई अन्य विकल्प नहीं हैं।
बता दें कि मेडिकल कॉलेज चंबा पर पांच विधानसभा क्षेत्रों चंबा, भरमौर-पांगी, डलहौजी, भटियात और चुराह के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर हैं। वर्ष 2017 में जिला अस्पताल चंबा को मेडिकल कॉलेज चंबा का तमगा को दिलवा दिया गया। बावजूद इसके अभी तक यहां पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान समय में मेडिकल कॉलेज चंबा में दो ही ईसीजी मशीन हैं। लिहाजा एक मशीन खराब होने से दूसरी मशीन के जरिए सामान्य व संक्रमित मरीजों के टेस्ट किए जा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज चंबा में 30 रुपये अदा कर मरीजों के ईसीजी टेस्ट होते हैं। वहीं, रेडक्रॉस में 50 रुपये अदा कर टेस्ट किए जाते हैं। यही टेस्ट बाजार में अमूमन 100 से 140 रुपये तक होते हैं।
एमएस डॉ. मोहन सिंह ने बताया कि चौथी मंजिल की मशीन बार-बार सैनिटाइज किए जाने से खराब हुई है जो जल्द ठीक होगी। इसके अलावा प्रबंधन की ओर से दो और ईसीजी मशीनों की डिमांड भेजी गई है। उपायुक्त चंबा डीसी राणा ने बताया कि उन्हें इस बारे जानकारी नहीं है। यदि ऐसी बात है तो मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से बात की जाएगी।
सदर विधायक पवन नैयर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज चंबा में यदि इस प्रकार की समस्या है तो उसका समाधान करवाने के लिए उचित पग बढ़ाए जाएंगे।
इसलिए किया जाता है ईसीजी टेस्ट
ईसीजी टेस्ट आमतौर पर दिल तक रक्त पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं में परेशानी, ऑक्सीजन की कमी, नसों का ब्लॉकेज, टिशूज की असामान्य स्थिति, सीनेज में तेज दर्द या सूजन, सांस लेने में तकलीफ, हार्ट अटैक के लक्षणों और दिल से जुड़ी अन्य समस्याओं का पता लगाने के लिए किया जाता है।