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Chamba News: मोबाइल की लत से मानसिक रोगों ने बच्चों के साथ बड़े भी लिए चपेट में

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चंबा। जिला चंबा के बच्चे तो बच्चे बड़ों में भी मोबाइल की लत लग गई है। मेडिकल कॉलेज चंबा में मनोरोग चिकित्सकों के पास पहुंचने वाले मामलों से इसका खुलासा हुआ है। आलम यह है कि व्यस्तता भरी जिंदगी में माता-पिता के पास अपने बच्चों के संग बैठ कर बातें करने, उनकी कमजोरियों और उनकी मनोदशा का पता लगाने का समय तक नहीं हैं। ऐसे में छोटे बच्चों से लेकर बड़े भी मानसिक रोग, तनावग्रस्त, चिड़चिड़ापन, संयम नहीं रखने समेत शैक्षणिक समेत अन्य कई गतिविधियों में अव्वल रहने वाले बच्चे पिछड़ते चलते जा रहे हैं। इसका समय रहते कोई हल न किया गया तो तनावग्रस्त बच्चे-बड़े कोई भी घातक कदम उठाने से पीछे नहीं रह सकते हैं।
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जिले के शहरी क्षेत्र ही नहीं, अपितु ग्रामीण क्षेत्र से इस प्रकार के मामले सामने आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज चंबा में मनोरोग चिकित्सक के पास सप्ताह में 10 से 15 मामले ऐसे ही सामने आ रहे हैं। इनका समयानुसार उपचार मनोरोग चिकित्सक अपने स्तर पर दवाइयों समेत काउंसलिंग के जरिए आरंभ कर रहे हैं। आधुनिकता की दौड़ में अब मोबाइल हर किसी की सबसे अधिक जरूरत बनता जा रहा है, लेकिन मोबाइल की लत के वशीभूत होकर परिजन और बच्चों में एक बड़ी खाई बनती जा रही है।

असर
मोबाइल अत्यधिक लत के चलते बच्चों और बड़ों के व्यवहार में बदलाव आना, धैर्य की कमी, संयम न रखना, जल्द नाराज हो जाना, गुस्सा अधिक आना, नींद पूरी न होना, स्कूल से शिकायतें आना, प्रतियोगिताओं में पिछड़ना और अकेले रहना पसंद करना इत्यादि शामिल हैं।
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उपाय
परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर दिनचर्या, बच्चों की पढ़ाई, विषयबार बातचीत करना, परिवार के बड़े सदस्यों के साथ बैठ कर उनकी बातें सुनना, मोबाइल पर गेम्स खेलने के बजाय खेल मैदान में विभिन्न खेलों को खेलने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करना इत्यादि शामिल हैं।

मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज शर्मा ने बताया कि बच्चों से लेकर परिवार के बड़े भी मोबाइल की लत में पड़ चु़के हैं। उनके पास पहुंचने वाले मामलों में शुरू में पता नहीं चल पाता है कि उनकी दिक्कत के पीछे मोबाइल की लत है। बातों-बातों में ही समस्या की जड़ मोबाइल सामने आता है। अत्याधिक मोबाइल के इस्तेमाल से लोग मानसिक रोग, तनावग्रस्त, चिड़चिड़ापन समेत बच्चे हर क्षेत्र में पिछड़ते चले जाते हैं। परिजनों को अपने बच्चों को पूरा समय देना चाहिए।
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