सलूणी (चंबा)। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के हालात खराब हैं। स्थायी शिक्षक भेजने के बजाय प्रतिनियुक्ति पर अध्यापक भेजकर विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है।
शिक्षा खंड सलूणी की राजकीय प्राथमिक पाठशाला लुहानी में एक साल से स्थायी अध्यापक नहीं है। इस कारण यहां विद्यार्थियों की संख्या में काफी गिरावट आ गई है। स्कूल में स्थायी अध्यापक थे तो विद्यार्थियों की संख्या 40 थी। स्थायी अध्यापक न होने पर स्कूल में 15 विद्यार्थी रह गए हैं। एक साल से यह स्कूल डेपुटेशन के सहारे चल रहा है। हैरानी की बात है कि विभाग और प्रशासन को भी इस बारे में अवगत करवाया गया है, मगर कोई सुध नहीं ली गई है। इससे पंचायत प्रतिनिधियों, अभिभावकों समेत स्कूल प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों में रोष है। उन्होंने सरकार और प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर एक सप्ताह के भीतर स्कूल में स्थायी अध्यापक की तैनाती नहीं की गई तो वे बच्चों को स्कूल नहीं भेजेगे।
गौरतलब है कि करीब डेढ़ साल पहले स्कूल में दो अध्यापक थे। एक शिक्षक पदोन्नत हो गया है। दूसरा शिक्षक सेवानिवृत्त हो गया है। तब से यह स्कूल रामभरोसे चल रहा हे। ग्राम पंचायत खरल की प्रधान पुष्पा देवी, उप प्रधान रविंद्र कुमार, वार्ड सदस्य ज्योति, एसएमसी सदस्य राजेश कुमार, अनिल कुमार ने कहा कि वे प्रशासन को भी ज्ञापन सौंप चुके हैं, मगर अभी तक आश्वासन ही मिले हैं।
स्कूल प्रबंधन समिति की अध्यक्ष निशा देवी ने कहा कि सरकार को सूचित कर दिया है। अगर जल्द शिक्षक की तैनाती न हुई तो अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी जगदीश चंद ने कहा कि इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है। उम्मीद है कि जल्द स्कूल को स्थायी शिक्षक मिलेगा।
एसडीएम सलूणी नवीन कुमार शर्मा ने कहा कि अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों ने अवगत करवाया है। शिक्षा विभाग को इस बारे में उचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।