भरमौर (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र भरमौर में दोहरे मतदान को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पंचायत चुनाव को लेकर अब तक की कवायद में भी प्रशासन दो जगह मतदान रोकने का उपयोगी विकल्प नहीं ढूंढ पाया है। प्रशासन की तरफ से सिर्फ यही तर्क दिए जा रहे हैं कि व्यक्ति दो जगह अपना वोट नहीं बना सकता है। लेकिन भरमौर क्षेत्र खासतौर पर होली और दूसरे अधिक ऊंचाई वाले इलाकों की करीब 50 प्रतिशत आबादी अब भी सर्दियों के दौरान निचले इलाकों में पलायन करती है।
ये लोग बैजनाथ, पालमपुर, धर्मशाला, नूरपुर एवं जसूर में रहते हैं। कांगड़ा जिला के इन इलाकों में ज्यादातर लोगों के पास अपनी जमीनें हैं और यहां साल के छह महीने वे गुजारते हैं। भरमौर में नवंबर महीने से पलायन का दौर शुरू हो जाता है। हालांकि, इस बार चुनाव की वजह से इसमें देरी हो रही है।
26 नवंबर को भरमौर में मतदान के बाद लोगों का पलायन शुरू हो जाएगा। निचले हिमाचल में होने वाले पंचायती राज चुनाव में इन लोगों के दोबारा मतदान की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी।
स्याही का प्रयोग किया जा सकता है : उपायुक्त
उपायुक्त एम सुधा देवी का कहना है चुनाव आयोग के सख्त निर्देश हैं कि कोई भी नागरिक दो जगह मतदान न कर पाए। यह सही है कि दोहरे मतदान को रोकने के लिए कोई ठोस बंदोबस्त नहीं हैं। लेकिन प्रशासन इस बार चुनाव से पहले उंगली पर ऐसी स्याही का इस्तेमाल करेगा जो महीनों तक नहीं मिटेगी। इससे मतदान करने वाले की पहचान हो जाएगी।
चुनाव में देरी से बढ़ेेगी संभावना : एसडीएम
एसडीएम भरमौर डॉ. जितेंद्र कंवर का कहना है कि इस बारे में अधिकारिक तौर पर बैठक कर ठोस रणनीति बनाई जाएगी। ताकि मतदाता दो जगह मतदान न कर पाएं। यदि निचले इलाकों के मतदान में ज्यादा देरी हुई तो दोहरे मतदान की संभावनाएं हैं।