चंबा। वन मंडल चंबा के तहत साल 2015 में नियम ताक पर रखकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नियमित करने का मामला सामने आया है।
आरोप है गलत वरीयता सूची बनाकर छह मजदूरों को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नियमित किया गया है। इसका खुलासा आरटीआई में ली गई जानकारी से हुआ है। शिकायतकर्ता की शिकायत मिलने के बाद मुख्य अरण्यपाल ने मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी। आरोप सही पाए गए तो नियमित किए गए कर्मचारियों की नौकरी छिन सकती है। साथ ही नियम दरकिनार कर गलत वरीयता सूची बनाने वाले कर्मचारी और अफसर भी नपेंगे।
शिकायतकर्ता ओमराज निवासी गांव तैमून डाकघर मसरूंड ने आरोप लगाया कि वन मंडल चंबा के अधीन साल 2015 में कर्मचारियों और अधिकारियों ने चहेते छह मजदूरों की गलत वरीयता सूची बनाकर गलत तरीके से बतौर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियमित करवाया।
वनरक्षक, वनखंड अधिकारी और वन परिक्षेत्र अधिकारी ने वरीयता सूची में 2013 से 2019 तक इन मजदूरों के प्रति वर्ष 240 दिन दर्शाए हैं, जबकि 2013, 2014 और 2015 के मस्टररोल में व्यक्ति ने कहीं भी न काम किया है और न ही कहीं उसका नाम दर्ज है। 2016 से 2019 मस्टररोल बंद होने के बाद भी कार्य बिल पर करवाया गया है। अन्य व्यक्ति का अक्तूबर 2014 और मार्च 2015 का मस्टररोल तक नहीं दिया गया है। अप्रैल 2015 से दिसंबर तक 9 माह, जनवरी से दिसंबर 2017 तक 12 माह और जनवरी 2017 एक माह के कुल 11 माह का कार्य बिल पर किया गया है। यह कुल 444 दिन की वरीयता बता रहा है। इसके अलावा जून 2017 तक पांच माह का बिल एमबी के अनुसार ही दर्शा दिया गया है। इसके अलावा शेष चार अन्य लोगों की वरीयता सूची को अधिकारियों और कर्मचारियों ने नियमों को दरकिनार कर तैयार कर अपनों को लाभ दिया है। शिकायतकर्ता ने वन अरण्यपाल से मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर दोषी कर्मचारियों-अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
मुख्य अरण्यपाल अभिलास दामोदर ने शिकायत मिलने की बात स्वीकारी है। बताया कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगामी कदम उठाए जाएंगे।