मणिमहेश यात्रियों के पंजीकरण पर रोक लग सकती है। भरमौर प्रशासन पर इस व्यवस्था को रोकने का दबाव बढ़ता जा रहा है। बीस रुपये की पंजीकरण फीस पर बखेड़ा खड़ा हो गया है। जिला प्रशासन की ओर से भी पंजीकरण व्यवस्था को बंद करने के निर्देश जारी हो चुके हैं।
यह निर्देश ऐसे समय दिए गए हैं, जब भरमौर प्रशासन यात्रियों के पंजीकरण का टेंडर जारी कर चुका है और 13 अगस्त से यात्रियों को पंजीकरण भी शुरू हो गया है। 16 अगस्त तक 2800 यात्रियों से मणिमहेश ट्रस्ट 56 हजार रुपये वसूल भी कर चुका है और यह प्रक्रिया अब भी जारी है। दरअसल, भरमौर प्रशासन ने पहली बार मणिमहेश यात्रियों के पंजीकरण का इंतजाम किया है। इसके लिए हड़सर के नजदीक गुई नाला में मणिमहेश जाने वाले सभी यात्रियों से बीस रुपये का शुल्क लेकर उनका पंजीकरण किया जा रहा है। इसके एवज में प्रशासन ने यात्रियों को मुफ्त पेयजल, मेडिकल व बीमार होने की स्थिति में हेलीकॉप्टर से आपात लैंडिंग की सुविधा दी थी। साथ ही प्रशासन ने दावा किया था कि ट्रस्ट को होने वाली इस आय को आगामी यात्राओं में रोप-वे बनाने पर खर्च किया जाएगा, जिससे जो यात्री चढ़ाई चढ़ने में सक्षम न हों, वे रोप-वे के इस्तेमाल से मणिमहेश के दर्शन कर सकें। लेकिन कई स्वयंसेवी संस्थाओं को प्रशासन की यह व्यवस्था रास नहीं आई और उन्होंने प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद अब मणिमहेश यात्रियों के पंजीकरण की व्यवस्था को बंद करने की नौबत आन पड़ी है।
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रोकनी पड़ सकती है व्यवस्था : एडीएम
उधर, अतिरिक्त दंडाधिकारी भरमौर विनय धीमान ने बताया कि उन्हें पंजीकरण रोकने के निर्देश मिले हैं। इन निर्देशों के संबंध में वे उपायुक्त से बात करने जा रहे हैं। उन पर पंजीकरण रोकने के लिए भारी दबाव है और आने वाले दिनों में यह व्यवस्था रोकनी पड़ सकती है।
पंजीकरण से साफ होनी थी यात्रियों की संख्या
मणिमहेश यात्रा में पंजीकरण शुल्क प्रदेश की पहली घटना नहीं है। बल्कि इससे पूर्व श्रीखंड यात्रा में पंजीकरण शुल्क वसूला जाता रहा है। भरमौर प्रशासन का दावा है कि ट्रस्ट की आय बढ़ाने के लिए यह विकल्प चुना था। इसकी वजह से पहली बार मणिमहेश यात्रियों की सही संख्या सामने आनी थी।