चंबा। आपदा और रास्ते बंद होने से जिला मुख्यालय चंबा में स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। मेडिकल कॉलेज चंबा में डायलिसिस सुविधा पूरी तरह सुचारु न होने से मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार शाम को 18 दिन बाद एक मरीज डायलिसिस कराने पहुंचा, लेकिन पानी की कमी और संसाधनों की दिक्कत के कारण उसे घर भेज दिया गया।
एक मरीज ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डायलिसिस केंद्र चलाने वाली कंपनी में आमतौर पर एक मरीज का डायलिसिस चार घंटे में होता है, लेकिन यहां लंबे इंतजार के बाद भी सुविधा नहीं मिल पाई। सोमवार शाम को न केवल उक्त मरीज, बल्कि सरोल और भदरंग से आए दो अन्य मरीजों को भी तीन-तीन घंटे इंतजार के बाद लौटा दिया गया।
मरीजों का कहना है कि आपदा की स्थिति में भी कंपनी को अपनी ओर से पर्याप्त संसाधन जुटाकर सुविधा उपलब्ध करवानी चाहिए। समाजसेवी जितेंद्र जसरोटिया, मंजीत सिंह, योगराज, उत्तम सुरेंद्र और सुराड़ा वार्ड की पार्षद
उर्मिला जसरोटिया ने कहा कि डायलिसिस मरीजों की समस्या गंभीर है। उन्होंने बताया कि एक मरीज तो पिछले 12 दिन बाद अस्पताल पहुंचा, लेकिन सुविधा न मिलने से उसे निराश होना पड़ा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से मांग की है कि डायलिसिस जैसी जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता से बहाल किया जाए, ताकि गंभीर मरीजों की जान पर खतरा न बने। मेडिकल काॅलेज के मीडिया समन्वयक डाॅ. माणिक सहगल ने बताया कि ऐसी शिकायत आएगी तो उसकी जांच की जाएगी।