पांगी में प्रजा का याण मेले में बैठे पुजारी।
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चंबा। जनजातीय क्षेत्र पांगी में आजकल जकारू उत्सव की धूम मची हुई है। जकारू उत्सव के उपलक्ष्य में मंगलवार को प्रजा का याण मेला धूमधाम से मनाया गया। सौर, रैंई, थांदल और पुर्थी पंचायत के लोग पारंपरिक वेशभूषाओं में मुलासनी माता मंदिर में माथा टेकने के लिए निकले। इस दौरान पूरा क्षेत्र माता के जयकारों से गूंज उठा।
मुलासनी माता मंदिर का पुजारी मुर्गी की वेशभूषा में विभिन्न देवताओं के चिह्नों और पुजारियों का स्वागत करने के लिए खड़ा रहता है। इस दौरान पुजारियों सहित श्रद्धालुओं के मेले में पहुंचने के बाद अन्य गांवों के ग्रामीण भी चार पंचायतों के लोगों से मिलते हैं। मंगलवार को दोपहर बाद मंदिर के पास खुली जगह पर महिला और पुरुषों ने एकत्रित होकर पारंपरिक वाद्य यंत्रों और नगाड़ों की थाप पर जमकर नृत्य किया।
मान्यता है कि जकारू उत्सव के दौरान सौर, रैंई, थांदल और पुर्थी पंचायतों के बाशिंदें 12 दिन तक अपने घरों से बाहर नहीं निकलते हैं। इन पंचायतों के ग्रामीण केवल प्रजा का याण मेले के दौरान ही अपने घरों से बाहर निकलते हैं। इसके बाद मेले में पूजा-अर्चना की जाती है। सौर, रैंई और थांदल पंचायतों के बाशिंदे देवताओं के साथ आए श्रद्धालुओं के साथ वाद्ययंत्रों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते मुलासनी माता मंदिर में माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं।
यहां पुजारी की ओर से देववाणी की जाती है। देववाणी के तहत लोगों को पता चलता है कि आगामी वर्ष सुख-समृद्धि रहेगी या फिर स्थिति विकट हो सकती है। मेले के दौरान विशेष तौर पर पकवान में हलवा-पूरी, राजमाह और चावल- कढ़ी बनाए जाते हैं। लोग एक-दूसरों के घरों में दावतों का सेवन करते हैं।