तीसा (चंबा)। खुंडी माता की डल झील की हजारों श्रद्धालुओं ने डेढ़ किलोमीटर परिक्रमा करके पुण्य कमाया। दो देवियों के मिलन को देखने के लिए जिलेभर से हजारों श्रद्धालु पहुंचे थे। माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। इस दौरान डल झील चारों ओर से श्रद्धालुओं से भरी रही। भाद्रो माह के सोमवार को इस यात्रा का आगाज होता है। ज्येष्ठ मंगलवार को खुंडी माता मंदिर में दो देवीयों के चिह्न लेकर श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस मिलन को देखने के लिए चांजू के दूरदराज क्षेत्रों के श्रद्धालु 28 से 30 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई चढ़कर यहां पहुंचते हैं। वाया साहो होकर कई किलोमीटर का पैदल सफर तय करके जब श्रद्धालु खुंडी माता के दरबार पहुंचते हैं तो उनकी सारी थकान मानों दूर हो जाती है। खुंडी माता के दरबार में यात्रा के दौरान चांजू और लिल्ह देवियों का अलौकिक मिलन होता है। इस यात्रा को मणिमहेश यात्रा के समान पवित्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस यात्रा को पूर्ण करने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना माता अवश्य पूरी करती है। इसी आस्था में श्रद्धालु दूरदराज के इलाकों से इस यात्रा पर आते हैं। देवियों के मूल स्थानों से उनके पद चिह्नों को उनके पुजारी अपने कंधों पर उठाकर यहां लाते हैं। मंगलवार को विधिविधान से मिलन के बाद देवियां अपने मूल स्थानों के लिए रवाना हो गईं। यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालु वाया चांजू और वाया साहो होकर पैदल यात्रा पूरी करते हैं। श्रद्धालुओं राकेश कुमार, नरेश कुमार, प्रकाश चंद, शक्ति प्रसाद, विवेक कुमार, राजेश कुमार, वीरेंद्र कुमार, हर्ष कुमार, रमेश कुमार, संजीव कुमार, काकू, पार्थ, हरीश कुमार, केवल कृष्ण, देवी सिंह और जगत राम ने बताया कि खुंडी माता की जातर की काफी मान्यता है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पहली बार आयुष विभाग की ओर से रियाली में चिकित्सा शिविर लगाया गया। जबकि, खुंडी माता मंदिर को जाने वाले दोनों रास्तों पर कई लंगर समितियों ने लंगरों की व्यवस्था भी की।