चंबा चौगान नंबर एक से अस्थाई रेहड़ी धारकों को हटाती पुलिस और नगर परिषद की टीम।संवाद
चंबा। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के लगाए प्रतिबंध के बाद भी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले चंबा के चौगान में वीरवार को बाजार के रूप में व्यापारिक गतिविधियां देखने को मिलीं। हैरत की बात है कि दशहरा पर्व के दौरान इस प्रकार की अव्यवस्था पर रोक लगाने में शासन-प्रशासन पूरी तरह से नाकाम होता ही नजर आया।
स्थानीय निवासी अमर सिंह, दलीप कुमार, कन्हैया राम, राजीव कुमार, नारायण सिंह और दलीप कुमार ने बताया कि व्यापारिक गतिविधि को लेकर उच्च न्यायालय ने रोक लगाई है। बावजूद इसके चौगान में दुकानदारी सजाना प्रशासन और नगर परिषद चंबा की लापरवाही ही कही जा सकती है। चौगान धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए आरक्षित क्षेत्र है। जिसे बाजार में बदल देना न केवल कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है बल्कि स्थानीय परंपरा के खिलाफ भी है।
उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले के आयोजन से पूर्व जिला प्रशासन की ओर से चंबा चौगान में व्यापारिक गतिविधियों को लेकर उच्च न्यायालय से अनुमति लेने पड़ती है। बावजूद इसके दशहरा पर्व पर नियमों को धता बताकर बाहरी व्यापारियों ने खुलेआम कपड़े, खिलौने, जूते और अन्य सामान की बिक्री की। प्रशासन और नगर परिषद चंबा की ओर से भी महज चालान करके अपने कार्य से इतिश्री की गई हैए जो कि, लोगों को रास नहीं आ रहा है।