कुगती की डुग्गी कैंप साइट में ठहरे हैं 34 विद्यार्थी
भूरे भालू को लेकर कई रोचक जानकारियां देख चहके विद्यार्थी
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। भूरे भालू पर अध्ययन करने के लिए जेएनयू दिल्ली से विद्यार्थियों का दल कुगती पहुंचा है। कुगती से दस किलोमीटर आगे डुग्गी नामक स्थान पर इन विद्यार्थियों के रात्रि ठहराव के लिए कैंप की व्यवस्था है।
डॉ. विपन राठौर ने विद्यार्थियाें को भूरे भालूओं के अस्तित्व को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि इस वन क्षेत्र में भूरे भालुओं के झुंड भी कई बार देखने को मिलते हैं। उन्होंने बताया कि दोपहर करीब 12 बजे भूरे भालू अपने आश्रय स्थलों को चले जाते हैं। पहाड़ी के घने जंगल से भूरे भालू अपने खाने की तलाश में शाम के समय बाहर निकलते हैं। रात के समय भूरे भालुओं के झुंड जंगल समेत आस-पास विचरण करते नजर आ जाते हैं। अब तक भूरे भालुओं पर कुगती वन क्षेत्र में हुए अधिकांश शोध के लिए बाहरी राज्यों समेत विदेश से भी पर्यटक यहां पहुंचे हैं। भूरे भालुओं के अस्तित्व को देखकर उन्होंने शोध पूरे किए हैं। विद्यार्थियों ने बताया कि उन्होंने भी यहां आते समय भूरे भालू को देखा। भूरे भालू को देख वे काफी चकित रह गए। विपन राठौर ने बताया कि वैली ऑफ फ्लावर के तहत जुलाई-अगस्त माह में कुगती क्षेत्र रंग-बिरंगी फूलों से खिल जाता है। यह दृश्य देखते ही बनता है। इस दौरान कुगती की प्राकृतिक वन संपदा की जानकारी भी विद्यार्थियों ने हासिल की। डॉ. विपन राठौर ने विद्यार्थियों ने कुगती के जंगल में पाई जाने वाली लकड़ी के बारे में कहा कि पाई जाने वाली लकड़ी का धुआं अधिक होता है लेकिन यह लकड़ी ग्रामीणों के लिए काफी लाभप्रद साबित होती है। डॉ. विपिन राठौर से महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर जेएनयू के विद्यार्थी चहक उठे।