सिहुंता क्षेत्र के किसान लावारिस पशुओं, सुअरों से फसलें बचाने को दे रहे पहरा
टिन के शेड बनाकर खेतों में काट रहे रातें, बोले- वर्षों से चली आ रही समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
सिहुंता (चंबा)। क्षेत्र के किसान दिन में मजदूरी और रात में खेतों की पहरेदारी कर अपनी फसल बचाने को मजबूर हैं। लावारिस पशु, सुअर और सांभर उनकी मेहनत को पलभर में बर्बाद कर देते हैं।
ठंडी रातों में टिन के शेड बनाकर जागना अब उनकी दिनचर्या बन गई है लेकिन प्रशासनिक मदद न मिलने से मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। दिन भर दिहाड़ी-मजदूरी कर परिवार का पेट पालने वाले किसान रात होते ही खेतों की पहरेदारी कर रहे हैं।
किसानों में वीरवाहन सिंह, राज कुमार, बचित्र सिंह, कनरैल सिंह, सुभाष चंद, नरेंद्र शर्मा, कर्म चंद और बृज लाल ने कहा कि कामला, गरनोट, समोट, धुलारा, बलाणा, हटली, थुलेल और गोला सहित आसपास के गांवों में हालात एक जैसे हैं। अधिकतर लोगों ने खेती छोड़ दी है। अब बहुत कम किसान ही जोखिम उठाकर फसल लगा रहे हैं, जिसे बचाना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिन भर मजदूरी कर घर चलाना पड़ता है और रात को खेतों में पहरा देना पड़ता है। अगर एक रात भी खेत खाली छोड़ दें तो पूरी फसल साफ हो जाती है। महंगे बीज, खाद और मेहनत के बावजूद जब फसल को जानवर नष्ट कर देते हैं। इससे आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। यह समस्या कोई नई नहीं है। वर्षों से यह परेशानी चली आ रही है। कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए, पंचायत स्तर पर प्रस्ताव दिए गए और अधिकारियों से मुलाकात कर समाधान की मांग की गई लेकिन ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हो पाई है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का जल्द समाधान निकाला जाए ताकि वे निश्चिंत होकर फसलों की बिजाई कर सकें।
पूर्व पंचायत प्रधान अनिल कुमार ने कहा कि सिहुंता में गोसदन बनकर तैयार है लेकिन इसकी देखरेख करने के लिए किसी संस्था की आवश्यकता है।