भरमौर (चंबा)। गुईनाला से दोनाली मणिमहेश जाने वाले रास्ते पर पहाड़ी दरकने से बड़ा हादसा टल गया है। गनीमत रही कि इस दौरान कोई भी मणिमहेश यात्री चपेट में नहीं आया।
मुख्य रास्ते से यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं ने पहाड़ी दरकने वाला वीडियो मोबाइल में कैद कर लिया। स्थानीय लोगों ने भूस्खलन के बारे में प्रशासन को अवगत करवाया। इसके बाद प्रशासन ने गुईनाला से दोनाली नाले के रास्ते मणिमहेश यात्रा करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
श्रद्धालुओं को हड़सर से मणिमहेश जाने वाले मुख्य और पुराने रास्ते के जरिये ही आवाजाही करने की सलाह दी गई है, जिससे किसी प्रकार से जान-माल का नुकसान न हो। बुधवार को दोपहर के समय अचानक पहाड़ी दरकने से भारी मात्रा पत्थर और मिट्टी नीचे आ गया।
चार दशक पहले गुईनाला से दोनाली के बीच नाले के साथ मणिमहेश के लिए रास्ता था। यहां से श्रद्धालु मणिमहेश की यात्रा करते थे, लेकिन 1995 में बादल फटने के कारण रास्ता तहस-नहस हो गया था। उसके बाद प्रशासन ने मणिमहेश के लिए 1996 में गुईनाला से दोनाली के बीच यमकुंड से होते हुए नया रास्ते का निर्माण करवाया। यह पुराने रास्ते कुछ मील लंबा था, लेकिन सुरक्षित था। 2001 में प्रशासन ने मणिमहेश के लिए फिर से पुराने गुईनाला से दोनाली के बीच पुराने रास्ते को ठीक करवा दिया। इसमें कुछ साल तो यात्रा चलती रही, लेकिन बीते दो साल पहले भारी बारिश, भूस्खलन और चट्टानें गिरने के कारण यह रास्ता बंद हो गया। इस बार फिर मार्ग को खोलने के प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन बुधवार दोपहर को इस मार्ग पर चट्टान और मलबा गिर गया। इससे यह रास्ता काफी खतरनाक हो गया है। ऐसे में प्रशासन ने गुईनाला पर पुराने रास्ते को बंद करने कासूचना बोर्ड लगा दिया है।
हड़सर पंचायत के उप प्रधान संजीव शर्मा और रवि शर्मा ने बताया कि मणिमहेश के लिए जा रहे श्रद्धालुओं को सुरक्षित मार्ग के बारे में जानकारी होना जरूरी है।
नागरिक उपमंडल अधिकारी कुलबीर सिंह राणा ने बताया कि जहां भूस्खलन हुआ है, उस रास्ते से कोई भी श्रद्धालु यात्रा पर न जाए। इसके लिए सूचना बोर्ड लगा दिया जाएगा। श्रद्धालु यात्रा करते समय सुरक्षा को लेकर पूरी एहतियात बरतें।