हमेशा के लिए अधूरी रह गई तीन साल की मासूम बच्ची अनाइजा की फरमाइश
जगत और रूहणूकोठी पंचायतों में दर्दनाक दुर्घटना के बाद नहीं जला चूल्हा
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पापा... घर लौटते वक्त खाने के लिए चीजी जरूर ले आना... तीन साल की मासूम बच्ची अनाइजा की यह फरमाइश अब हमेशा के लिए अधूरी रह गई है। धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने के लिए रविकांत हंसी-खुशी बेटी को चीजी (खाने-पीने की वस्तु) लेकर आने की बात कहकर घर से निकले थे। अपनी ऑल्टो कार में मामी, भांजे और नानी को बैठाकर वे हंसते गाते जा रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
रास्ते में हुई कार दुर्घटना ने चार परिवारों की खुशियां पल भर में छीन लीं। हादसे की खबर जैसे ही गांव पहुंची, जगत और रुहणूकोठी पंचायतों में मातम छा गया। हर घर की आंखें नम थीं और शोक की ऐसी लहर दौड़ी कि कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, उनके लिए यह हादसा ऐसा घाव बन गया है जो शायद कभी नहीं भर पाएगा। यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि चार परिवारों के जीवन में ऐसा दर्द बनकर दर्ज हो गया है जिसकी टीस उन्हें ताउम्र सालती रहेगी।
... बच्चों के सिर से उठा मां का साया
हादसे में लता देवी पत्नी राजिंद्र, चतरो देवी पत्नी पुन्नू राम और बसेहरो देवी पत्नी गनिया राम की मृत्यु हो गई। लता देवी अपने पीछे एक बेटा और तीन बेटियां छोड़ गईं, जबकि चतरो देवी के पीछे एक बेटा और दो बेटियां रह गईं। बसेहरो देवी अपने पीछे तीन बेटे और तीन बेटियां छोड़ गईं जिनके सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया।
आज पैतृक श्मशानघाट में किया जाएगा अंतिम संस्कार
मृतका लता देवी और चतरो देवी का परिवार कांगड़ा में बस गया था। वे धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने पैतृक घर लौटी थीं। बसेहरो देवी की बेटियों की शादी कांगड़ा में हो चुकी है। हादसे में शामिल चालक का भाई बद्दी स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत है। परिजनों के रूहणूकोठी और उरेई पहुंचने के बाद अब रविवार को पैतृक श्मशानघाट पर सभी मृतकों का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार किया जाएगा।