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चंबा मेडिकल कॉलेज में कोरोना मरीजों के नहीं हो रहे डी डाइमर टेस्ट

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चंबा। जिले में भले ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कोरोना से निपटने के लिए कड़े प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज में चल रहे कोविड अस्पताल में उपचाराधीन मरीजों को संपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अभी तक नहीं मिल पा रहा है।
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कोरोना संक्रमित मरीज को हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक से बचाने के लिए जरूरी टेस्ट डी डाइमर की सुविधा नहीं है। इस टेस्ट को करवाने के लिए चंबा से मरीजों के नमूने एसआरएल लैब के जरिये बाहरी राज्य में भेजे जा रहे हैं। जहां से टेस्ट की रिपोर्ट चार से पांच दिन के बाद चंबा आती है।
ऐसे में कोरोना मरीज को हार्ट अटैक और ब्रेन अटैक होने का खतरा बढ़ जाता है। चंबा में अब तक कोरोना से मरने वाले मरीजों को हार्ट अटैक भी हुआ है, लेकिन अभी तक मेडिकल कॉलेज प्रबंधन उपरोक्त टेस्ट को करने वाली मशीन को चंबा के मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं करवा पाया है। टेस्ट की रिपोर्ट आने तक गंभीर रूप से बीमार मरीज की जान जाने का खतरा ज्यादा रहता है।
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स्वास्थ्य जानकारों के अनुसार कोरोना से संक्रमित होने के बाद हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बना रहता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि फेफड़े की रक्त वाहिकाओं में रुकावट के कारण खून का थक्का बन जाता है, लेकिन अगर इसका समय रहते पता लगा लिया जाए तो हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के खतरे को समय रहते रोका जा सकता है। इसके लिए डी डाइमर टेस्ट किया जाता है, ताकि हार्ट अटैक एवं ब्रेन स्ट्रोक की आशंका को समय रहते पहचान लिया जाए और खून को पतला करने वाली दवाओं से इसे रोक दिया जाए। कोविड के नए मामलों में डॉक्टर अब इस टेस्ट की सलाह दे रहे हैं, लेकिन चंबा मेडिकल कॉलेज में इस टेस्ट के लिए कोई सुविधा नहीं है। मरीजों के नमूने लेकर बाहरी राज्य में भेजे जा रहे हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर मोहन सिंह ने बताया बताया कि धीरे-धीरे मेडिकल कॉलेज में सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। जल्द ही डी डाइमर टेस्ट करवाने की भी व्यवस्था की जाएगी।
डलहौजी अस्पताल में मशीन लगाने के लिए आशा कुमार ने दिए 5.90 लाख
डलहौजी विस क्षेत्र की विधायक आशा कुमारी ने हाल ही में सिविल अस्पताल डलहौजी को इस उपरोक्त टेस्ट सहित अन्य टेस्टों को करने वाली मशीन की स्थापना को विधायक निधि से पांच लाख 90 हजार की धनराशि दी है, लेकिन चंबा मेडिकल कॉलेज के लिए किसी भी विधायक ने उपरोक्त मशीन के लिए विधायक निधि देना जरूरी नहीं समझा। इस कारण चंबा मेडिकल कॉलेज में अभी तक यह महत्वपूर्ण टेस्ट शुरू नहीं हो पाया है, जो कि कोरोना मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।
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