पंचायत चुनाव में प्रतिस्पर्धा करने जा रहे उम्मीदवारों की असली परीक्षा 21 दिसंबर से शुरू होगी। चुनाव चिन्ह हासिल करने के बाद सभी उम्मीदवार अपनी ताकत प्रचार में झोंक देंगे। इसके साथ ही प्रशासन भी उम्मीदवारों की हरकतों पर नजर रखना शुरू कर देगा। 21 दिसंबर से चुनाव संपन्न होने तक किए गए खर्च का भी हिसाब उम्मीदवारों से लिया जाएगा।
सोमवार को जिला परिषद उम्मीदवारों को उनके चुनाव चिन्ह एसडीएम कार्यालय में, बीडीसी उम्मीदवारों को ब्लॉक कार्यालय में जबकि पंचायत प्रधान, उपप्रधान व वार्ड सदस्यों को पंचायत स्तर पर चुनाव चिन्ह वितरित होंगे।
पंचायतों के लिए पहली दिसंबर से चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में पहली तारीख को चुनाव वाली पंचायतों में उम्मीदवारों को नौ दिन प्रचार के लिए मिलेंगे। चुनाव से 48 घंटे पूर्व प्रचार रोक दिया जाएगा और इस दौरान किसी भी तरह की रैली या लाउड स्पीकर का इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। सोमवार को ही नाम वापस लेने के बाद चुनाव के असली दावेदारों की भी पहचान हो जाएगी।
तीन बजे तक नाम वापस लेने का समय निर्धारित किया गया है। जबकि उसके बाद चुनाव चिन्ह वितरित कर दिए जाएंगे। नामांकन दाखिल करने के बाद प्रबल उम्मीदवार ऐसे दावेदारों को मनाने में जुट गए थे जो सिर्फ वोट खराब करने की नियत से चुनाव में उतर रहे थे। ऐसे में सोमवार को कई उम्मीदवारों के नाम वापस ले लेने की भी संभावना बनी हुई है।
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48 घंटे पहले थम जाएगा प्रचार : डीपीओ
उधर, जिला पंचायतीराज विभाग अधिकारी एमएस नेगी का कहना है कि पंचायत चुनाव की सभी तैयारियां पूरी हैं। 21 दिसंबर के बाद सभी उम्मीदवारों पर नजर रखी जाएगी। चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की इजाजत किसी को नहीं होगी। मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार पर रोक रहेगी।