अब से चौबीस घंटे बाद भरमौर की 29 पंचायतों में मतदान और देर रात तक नतीजे भी सामने होंगे। भरमौर से चुनाव में उतरे प्रत्याशियों को इस बार एक हफ्ते से भी कम समय में प्रचार पूरा करना पड़ा है।
जिलापरिषद के कई उम्मीदवार तो सभी पंचायतों तक पहुंच भी नहीं पाए हैं। अक्तूबर महीने के आखिर तक आरक्षण का रोस्टर सार्वजनिक नहीं हो पाया था। सात नवंबर से भरमौर में मतदान को लेकर कदमताल शुरू हुई थी। 17 नवंबर को चुनावचिन्ह आवंटित हुए थे। ऐसे में उम्मीदवारों को 18 से 23 तक का ही समय प्रचार के लिए मिल पाया है। अब 26 नवंबर को शाम पांच बजे से सभी 29 मतगणना केंद्रों में मतों की गिनती शुरू हो जाएगी। सबसे पहले वार्ड सदस्य के चुनाव परिणाम सामने आएंगे और उसके बाद पंचायत प्रधान व उपप्रधान के।
पंचायत समिति सदस्य के मतों की गणना 28 नवंबर को होगी। जबकि जिलापरिषद के मतों की गणना प्रदेश के बाकी इलाकों में होने वाले पंचायतीराज चुनाव की मतगणना के साथ ही पूरी होगी। भरमौर प्रशासन ने खंड विकास अधिकारी कार्यालय भरमौर में सूचना केंद्र स्थापित किया है। सभी 29 पंचायतों में आने वाले परिणामों की जानकारी केंद्र में एकत्र होगी। केंद्र में इस जानकारी को उपमंडल मुख्यालय में सार्वजनिक भी किया जाएगा।
पंचायतीराज चुनाव के लिए इस बार अलग-अलग रंग के मतपत्र बनाए गए हैं ताकि मतगणना केंद्र में मौजूद कर्मचारियों को इनकी छंटनी और गिनती में आसानी हो। भरमौर प्रशासन ने रात नौ बजे से आखिरी परिणाम सामने आने की संभावना जताई है। सभी पंचायतों से चुनाव पार्टियां 27 नवंबर तक जिला मुख्यालय में पहुंच जाएंगी।
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रात नौ बजे तक आ जाएंगे सभी परिणाम : एसडीएम
एसडीएम भरमौर डॉ. जितेंद्र कंवर ने बताया कि सभी मतदान केंद्रों के लिए चुनाव पार्टियां रवाना कर दी गई हैं। 26 नवंबर को तीन बजे तक मतदान होगा। तीन बजे मतदान केंद्र के गेट बंद कर दिए जाएंगे, लेकिन गेट बंद करने से पूर्व जो लोग मतदान केंद्र में होंगे उन्हें वोट डालने से नहीं रोका जाएगा। उन्होंने कहा कि रात नौ बजे तक सभी परिणाम सामने आने की संभावना है।
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भाजपा और कांग्रेस का वर्चस्व भी दाव पर
भले ही जनजातीय क्षेत्र में हुए पंचायतीराज चुनाव बिना किसी पार्टी चिन्ह के संपन्न हुए हों लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों ही बड़ी पार्टियों ने सार्वजनिक मंच से अपने-अपने उम्मीदवारों के पक्ष में वोट मांगें हैं। खुले तौर पर भाजपा और कांग्रेस ने उम्मीदवारों को अपना कहने से परहेज नहीं किया है। ऐसे में अब उनकी हार का ठीकरा और जीत का सेहरा भी दोनों राजनीतिक पार्टियों के नुमाइंदों के सिर बंधना तय हो गया है।