चंबा। चामुंडा मंदिर के पास जंगल में आग भड़कने से जहां वन संपदा स्वाह हो गई। वहीं आग के धुएं ने पूरे शहर को अपनी चपेट में जकड़ लिया। शहर के चारों तरफ आसमान में जंगल की आग का धुआं भर गया। इससे लोगों को सांस लेने में भी तकलीफ होने लगी। हैरानी इस बात की कि दिन भर जंगल धू-धू कर जलता रहा, लेकिन वन विभाग और अग्निशमन विभाग की तरफ से कोई आग बुझाने के लिए नहीं पहुंचा।
ऐसा लग रहा था कि विभाग जंगल की आग से अनभिज्ञ है। हालांकि ऐसा कहना तथ्य से परे होगा। क्योंकि जहां पर आग लगी थी वह जंगल शहर के साथ सटा हुआ है। इसलिए जब आसमान में जंगल का धुआं भरने लगा तो हर किसी की नजर उस जंगल की तरफ जा रही थी। जंगल की आग में पेड़-पौधे जलकर नष्ट हो गए। जीव जंतुओं के साथ पक्षियों के घौंसले भी आग की भेंट चढ़ गए। जलते हुए जंगल के ऊपर पक्षी घौंसलो को बचाने के प्रयास में काफी देर तक उड़ते रहे। लेकिन आग इतनी भयंकर थी कि सब कुछ जलकर राख हो गया। जिन लोगों ने जंगल में आग लगाई, उनका भी कोई सुराग नहीं लग पाया।
जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग को कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। हालांकि मुख्य वन अरण्यपाल ओपी सोलंकी ने बताया कि जंगल में आग की घटनाओं को रोकने के लिए विभाग पूरे प्रयास कर रहा है। इसके लिए कमेटियों का गठन किया गया है। आग लगाने वालों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है।
उन्होंने स्थानीय लोगों से भी विभाग का सहयोग देने की अपील की है। मगर शहर से सटे जंगल में आग के दौरान न ही यह कमेटिया नजर आई और न ही वन विभाग की तरफ से कोई पहल की गई, जिससे लाखों की वन संपदा यूं की राख हो गई। इसके साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा।