चंबा। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार को सत्ता में आए महज तीन माह ही हुए हैं लेकिन कांग्रेस सरकार का ग्राफ बिल्कुल निचले स्तर पर पहुंच गया है। लोकप्रियता के हिसाब से यह कहा जा सकता है कि हिमाचल प्रदेश के कांग्रेस सरकार के नेतृत्व के खिलाफ अब लोगों ने आवाज बुलंद कर दी है। इसकी बाजपा ने शुरुआत की है।
चंबा में पत्रकारों से बीतचीत में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं पूर्व विस अध्यक्ष डॉ. विपिन परमार ने यह बात कही। कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद इस सरकार ने जो लोगों को उपचार दिया है वह इतिहास में उन अक्षरों में लिखा जाएगा जो आने वाली पीड़िां पढ़ेंगी। कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने लोगों की सुविधा के लिए भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर कई संस्थान खोले लेकिन सुखविंद्र सिंह सुक्खू की कांग्रेस सरकार ने ऐसे लगभग सभी संस्थानों को जो एक अप्रैल 2021 के बाद खुले थे, उन्हें बंद करने के फरमान जारी किए। कहा कि प्रदेश की जनता के साथ कांग्रेस सरकार ने बहुत बड़ा धोखा किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश में यह एक्सीडेंटल सरकार है। कैसे इनके मुख्यमंत्री बने हैं ये सब जानते हैं। विधानसभा चुनाव में महज 36,000 वोट उन्हें अधिक मिले हैं। इसके लिए वह लोकतंत्र में जनता के जनादेश का स्वागत करते हैं। लेकिन कांग्रेस सरकार ने सत्तासीन होते ही संस्थानों को बंद करने, वैट बढ़ाने, बच्चों को निशुल्क मिलने वाली वर्दियों को बंद करवा कर जनता विरोधी निर्णय किए हैं।
चंबा जिले की बात की जाए तो यहां पर 25 संस्थान कांग्रेस सरकार ने बंद करवाए हैं। इसी के विरोधस्वरूप भाजपा ने हस्ताक्षर अभियान चलाया है। 13 तारीख को प्रदेश के राज्यपाल को लाखों लोगों की ओर से बंद किए गए संस्थानों के विरोधस्वरूप हस्ताक्षर किए गए ज्ञापन सौंप कर बंद संस्थानों को पुन: खोलने की मांग उठाई जाएगी। कहा कि कांग्रेस सरकार मदहोशी की अवस्था में है। अब तक वह अपनी गारंटियां पूरी नहीं कर पाई हैं। महज ओपीएस का डंका ही बजा जा रही है। कहा कि कर्मचारी वर्ग को ओपीएस देने का वह भी स्वागत करते हैं लेकिन 71 लाख लोगों पर बेवजह टैक्स का बोझ न डाला जाए। कहा कि एक वर्ग को खुश करने के चक्कर में लाखों लोगों को उसकी भरपाई नहीं करने देंगे।