रितिका ठाकुर। महिला उत्थान संबंधी
चंबा। कभी स्कूल फीस भरने के लिए मंच पर कदम रखने वाली रितिका ठाकुर आज चंबा ही नहीं, बल्कि पूरे देश में हिमाचली लोक संस्कृति की पहचान बन चुकी हैं। नृत्यांगना, एंकर, कॉरियोग्राफर और खिलाड़ी... हर रूप में उन्होंने अपनी पहचान बनाई है
सुल्तानपुर वार्ड के ओबड़ी मोहल्ला निवासी रितिका बचपन से ही आर्थिक तंगी से जूझती रहीं। उसी संघर्ष ने उन्हें मंच पर धकेला और वहीं मिली तालियों ने जीवन की राह बदल दी। हिमाचली लोक कलाकार मंजू चिश्ती के समूह से शुरुआत और अमीन मलिक मीनू भाई के मार्गदर्शन ने उन्हें पहचान दिलाई। दसवीं में रिलीज हुई उनकी सीडी रज्जमा सुपरहिट रही, जिसके बाद उनके गीत लगातार हिट होते रहे। यही नहीं, उन्होंने 150 से अधिक बच्चों को निशुल्क हिमाचली नृत्य व अभिनय की ट्रेनिंग दी है और वर्तमान में भी बच्चों को ट्रेनिंग देने का काम जारी है।
रिकॉर्ड बनाने वाली बेटी
साल 2014 में अपने समूह का पंजीकरण करवाने के बाद रितिका ने 2017 में दिल्ली गणतंत्र दिवस परेड में चंबा रुमाल की झांकी में भाग लिया। खास बात यह कि वह हिमाचल की पहली महिला कलाकार हैं, जो चार बार गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुईं।
उपलब्धियां और योगदान
केरल, हरियाणा, गुजरात, दिल्ली समेत कई राज्यों में प्रस्तुतियां
जसपाल भट्टी अवार्ड के तहत हंसदा मुखड़ा पुरस्कार
चंबा चौगान रामलीला में 15 वर्षों से ‘सीता’ की भूमिका
फुटबॉल में 4 राष्ट्रीय और हॉकी में 2 राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी
मां कांता ठाकुर के सहयोग और आशीर्वाद से ही आज इस मुकाम तक पहुंच पाई हैं। -रितिका