चंबा। पेंशन से बिना छेड़छाड़ किए हुए करुणामूलक् नौकरी का समाधान निकालने की मांग करुणामूलक संघ ने उठाई है। संघ ने सरकार को चेताया है कि यदि ऐसा न किया गया तो वे संघर्ष की राह पर चलने के लिए विवश होंगे।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि संघ ने करुणामूलक परिवारों के हक की लड़ाई पहले भी लड़ी थी और आगे भी लड़ने के लिए तैयार है। संघ पूर्व सरकार के समय 432 दिन की क्रमिक भूख हड़ताल शिमला में कर चुका है। इस संघर्ष में बहुत से परिवारों को राहत मिली थी। कहा कि जब किसी कर्मचारी की मृत्यु होती है तो परिवार में अगर कोई नौकरी के लिए आवेदन करता है तो उस परिवार की पेंशन एक तिहाई वैसे भी हो जाती है। जिन परिवारों ने फुल पेंशन ली होती है वे नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर पाते हैं। सरकार से आग्रह है कि वैसे भी इन परिवारों को एक तिहाई पेंशन मिलती है और अब सरकार इस एक तिहाई पेंशन पर कैंची न चलाए क्योंकि आज तक जितनी भी भर्तियां हुई है पेंशन के साथ छेड़छाड़ किए बिना हुई हैं। आगे भी जो भी भर्तियां हों, पेंशन में छेड़छाड़ किए बिना की जाएं। पेंशन में छेड़छाड़ करने से बेहतर है सरकार आय सीमा बढ़ाने पर विचार करे।
अगर सरकार आय सीमा बढ़ाती है और टेक्निकल प्वाइंट पर विचार करके उन्हें हटाती है तो संघ इस फैसले पर सरकार का समर्थन करेगा। कहा कि अगर सरकार एक तिहाई पेंशन में भी छेड़छाड़ करने की सोच रही है तो संघ अपना संघर्ष तेज करेगा। प्रदेशाध्यक्ष का कहना है कि सरकार करुणामूलक संघ की राज्य कार्यकारिणी को वार्ता को बुलाए तभी करुणामूलक नौकरी बहाली मुद्दे में कोई निष्कर्ष निकलेगा। कहा कि जब 2017 में कांग्रेस की सरकार थी तब भी सरकार ने पेंशन को आय सीमा में न जोड़कर बिना किसी शर्त के अपने चहेतों नौकरी दी थी। तब क्यों नही ऐसा विचार लाया गया। कहा कि सरकार करुणामूलक नौकरी बहाली में बिना दोगले व्यवहार किए स्थिति स्पष्ट करे।