चंबा। सर्दी-जुकाम, दस्त और बुखार ने जिले के नौनिहालों को अपनी गिरफ्त में जकड़ लिया है। आलम यह है कि अब बीमार होने वाले बच्चों की संख्या के आगे मेडिकल कॉलेज चंबा में बिस्तर कम पड़ने लगे हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण मेडिकल कॉलेज चंबा के द्वितीय तल पर देखा जा सकता है। यहां पर बिस्तरों की कमी के चलते अब एक बिस्तर पर दो-दो बच्चों को दाखिल किया जा रहा है। इतना ही नहीं रोजाना आठ से दस बच्चे मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए दाखिल हो रहे हैं तो इतने से अधिक उपचाराधीन बच्चों को छुट्टी दी जा रही है। खैर, कॉलेज प्रबंधन की ओर से अभिभावकों को जरूरी परामर्श और दवाइयों का सेवन करने के बारे में चेताया भी जा रहा है।
गौरतलब है कि मौसम परिर्वतन का सबसे अधिक प्रभाव छोटे बच्चों पर पड़ता दिख रहा है। मेडिकल कॉलेज चंबा में जिले के पांचों विधानसभा क्षेत्रों से रोजाना सैकड़ों की संख्या में अभिभावक नवजात शिशुओं और किशोरों को ओपीडी में उपचार करवाने और जरूरी परामर्श लेने के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सक भी अभिभावकों को बच्चों को गर्म पानी पिलाने, अधिक पक्के फलों का सेवन न करने समेत जंक फूड का सेवन न करने के बारे में सख्त हिदायत दे रहे हैं। अभिभावकों सुरेश ठाकुर, नरेश कुमार, राजीव कुमार, विनोद कुमार, संजय कुमार, कपिल कुमार, हितेश कुमार, संजीव कुमार आदि ने बताया कि दोपहर के समय शरीर जला देने वाली भीषण गर्मी के बाद सुबह और रात के समय पड़ने वाली ठंड से बच्चे सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार, पेट दर्द, उल्टी-दस्त से पीड़ित हो रहे हैं।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कपिल शर्मा ने बताया कि मौसम परिवर्तन के कारण ही बच्चे सीजनल बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को अधिक पक्के फलों का सेवन न करने, जंक फूड का सेवन न करने, पानी गर्मी करके पीने की सलाह दी है। बताया कि बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर तुंरत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सीय परामर्श लें।