शहर के चार वार्डों में सफाई व्यवस्था पर छिड़ी बहस में भाजपा और कांग्रेस दोनों के सुर आपस में मिल गए हैं। जिन चार वार्डों की सफाई व्यवस्था पर हो-हल्ला हो रहा है, इनमें से एक वार्ड खुद अध्यक्ष का है। जबकि तीन अन्य में से दो वार्ड पार्षद भाजपा के हैं जबकि एक कांग्रेस से संबंधित है।
शुक्रवार को नगर परिषद अध्यक्ष नीलम नैय्यर समेत तीनों वार्ड पार्षदों ने एक सुर में पूर्व सफाई ठेकेदार सुबोध पाठक को हटाने के निर्णय को सही करार दिया। पार्षदों ने बताया कि सफाई ठेकेदार ने खुद 1.20 लाख रुपये में सफाई का ठेका हासिल किया था। मार्च 2016 में उसका अनुबंध नगर परिषद के साथ खत्म हो गया लेकिन नए टेंडर न होने की वजह से नगर परिषद दो महीने तक पुराने ठेकेदार से ही काम लेती रही।
इस बीच सफाई ठेकेदार सुबोध पाठक ने नगर परिषद को कई बार लिखित रूप में अनुबंध की राशि बढ़ाने के बारे में पत्र सौंपे और यह एलान किया कि उसकी राशि नहीं बढ़ाई गई तो वह काम छोड़ देगा। जिन चारों वार्डों में सफाई ठेकेदार काम चला रहा था वहां के पार्षदों से सुझाव लेने के बाद सुबोध पाठक के अनुबंध को रद्द किया गया और उसी कीमत पर इस काम में पहले से सफाई कार्य कर रहे दूसरे ठेकेदारों को सौंप दिया गया। उन्होंने बताया कि अब सफाई ठेकेदार नगर परिषद पर दबाव बनाकर काम छीनने का आरोप लगा रहा है। असल में पैसे बढ़ाने का दबाव सफाई ठेकेदार नगर परिषद पर बना रहा था। इस मौके पर जनसाली की पार्षद सीमा कश्यप, सुराड़ा के पार्षद पुरु मनेंद्र सिंह, हटनाला के पार्षद धीरज बडियाल मौजूद रहे।
पैैसे बढ़ाने को बोला तो रास्ते से हटा दिया : पाठक
सफाई ठेकेदार सुबोध पाठक का कहना है कि उसका अनुबंध 31 मार्च को समाप्त हो गया था। कायदे से पहली अप्रैल से नगर परिषद को टेंडर करने चाहिए थे। नगर परिषद के अनुरोध पर ही वह दो महीने से सफाई का काम किसी तरह चला रहा था। जब उसने पैसे बढ़ाने की मांग की तो सबने उसे हटाकर चहेतों को काम दे दिया। सवाल यह है कि नगर परिषद ने जब ऑनलाइन टेंडर आमंत्रित किए हैं उन्हें जारी करने में क्यों देरी हो रही है।